अयोध्या चढ़ावा चोरी: चार्जशीट में ट्रस्ट को क्लीन चिट, चंपतराय, अनिल मिश्र व गोपाल राव सरकारी गवाह
पुलिस ने अयोध्या श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में आठ आरोपियों के खिलाफ 73 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ 73 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट पदाधिकारियों और बैंक को जांच में क्लीन चिट मिली।
चंपतराय, अनिल मिश्र, गोपाल राव सरकारी गवाह बनाए गए।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। बहुचर्चित श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने जेल में बंद आठ आरोपितों के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। बुधवार को 90 दिन की समयावधि पूरी होने के साथ ही बाराबंकी के एएसपी रितेश कुमार सिंह व विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी 73 हजार 480 पन्नों की चार्जशीट चार बड़े बक्सों में लेकर न्यायालय पहुंचे। साक्ष्य न मिलने पर आरोप पत्र में ट्रस्ट पदाधिकारियों और बैंक को क्लीन चिट दे दी गई है।
पूर्व महासचिव चंपतराय, ट्रस्टी डा.अनिल मिश्र व मंदिर के व्यवस्था प्रमुख रहे गोपाल राव को सरकारी गवाह बनाया गया है। मंदिर से कीमती आभूषण के गायब होने की बात पुलिस ने खारिज कर दी है। चार्जशीट के कुल 59 पेजों में मुख्य बिंदु हैं, जबकि अन्य में विवेचना से जुड़े साक्ष्य, आरोपितों व गवाहों के बयान का उल्लेख है। चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद 25 जून को ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की तहरीर व एसआइटी की संस्तुति पर रामशंकर यादव टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
आरोप पत्र में इन सभी के अपराधों का उल्लेख है। सीसीटीवी फुटेज में चोरी से जुड़ी 105 घटनाओं का जिक्र और 173 गवाहों के बयान हैं। इन लोगों के बीच लगभग 3300 मैसेज पुलिस ने सर्विलांस सेल के माध्यम से प्राप्त किए हैं। अनुकल्प को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। वह दूसरों से चोरी करवाता था। धनराशि का बंटवारा जनौरा के पास हाईवे के निकट बाग में किया जाता था।
अनुकल्प ने अपने बहनोई लवकुश को भी मंदिर में नौकरी दिलवाई थी। इसी तरह चंपतराय के चालक टिन्नू के पास बिना किसी आदेश के दानपात्रों की चाबियां होने की बात भी चार्जशीट में है। टिन्नू श्रद्धालुओं से दर्शन कराने के नाम पर रुपये लेता था। वह वाहनों को किराये पर चलवाता था और उसको इससे करीब 90 हजार रुपये प्रतिमाह आय होती थी।
कौन सी धारा में क्या है चढ़ावा चोरी प्रकरण की एफआइआर में आपराधिक न्यासभंग, चोरी की संपत्ति रखने, आपराधिक साजिश और सामूहिक जिम्मेदारी से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं। धारा 316(5) सबसे गंभीर है। यह जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपी गई धनराशि या संपत्ति के गबन अथवा दुरुपयोग से संबंधित है, जिसमें आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रविधान है।
धारा 317(4) और 317(5) चोरी या गबन की संपत्ति को जानबूझकर रखने, छिपाने या उसके निस्तारण में मदद करने से जुड़ी हैं, जिनमें तीन से सात वर्ष तक की सजा हो सकती है। धारा 61 आपराधिक साजिश से संबंधित है। सामूहिक साजिश में गंभीर अपराध साबित होने पर मुख्य अपराध के अनुरूप सजा हो सकती है। धारा 3(5) साझा मंशा से अपराध करने पर सभी आरोपितों की सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी तय करती है।
