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अलर्ट होते तो पिछले साल ही पकड़ी जाती राम मंदिर की चढ़ावा चोरी, दानपात्रों के पैसे कम होने की पहले भी हुई थी आशंका

Published: Wed, 01 Jul 2026 05:33 AM (IST)Updated: Wed, 01 Jul 2026 06:53 AM (IST)

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का शक पिछले साल ही हो गया था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दी ...और पढ़ें

राम मंदिर।

राम मंदिर।

HighLights

  1. चढ़ावा चोरी की आशंका पिछले साल अप्रैल-मई में हुई थी।

  2. रामशंकर यादव टिन्नू ने सीसीटीवी फुटेज डिलीट करवाई थी।

  3. एसआईटी फुटेज रिकवर करने का प्रयास कर रही है।

लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। दानपात्रों से नकदी कम होते रहने की आशंका तो पिछले वर्ष अप्रैल-मई माह में ही हो गई थी। ट्रस्ट के एक पदाधिकारी को जानकारी भी दी गई। उन्होंने अपने स्तर से जांच भी कराई, लेकिन यह आशंका पुष्ट नहीं हो सकी।

इसी बीच जांच-पड़ताल के डर से रामशंकर यादव टिन्नू ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सीसी कैमरों की फुटेज डिलीट करा दी। इसके बाद भी निगरानी व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, जिसकी परिणति इस वर्ष पांच जून को देखने को मिली। एसआइटी ने भी प्रारंभिक जांच में फुटेज से छेड़छाड़ पाई है और डाटा रिकवर कराने का प्रयास हो रहा है।

प्रयागराज के महाकुंभ के दिनों में जब देश-विदेश से बड़ी संख्या में दर्शनार्थी आने लगे, तो रामलला को अर्पित की जाने वाली धनराशि व आभूषणों की मात्रा एकाएक काफी बढ़ गई थी। यह क्रम जनवरी से फरवरी माह तक चला। महाकुंभ समाप्त हुआ, तो पहले के सामान्य दिनों की अपेक्षा भी दान की नकदी काफी कमी मिलने लगी।

धनराशि में पाई जाने लगी कमी

गिनती के बाद जब बैंक में धनराशि जमा कराई जाती, तब भी पूर्व की अपेक्षा कमी पाई जाने लगी। इस पर चोरी की आशंका हुई और एक ट्रस्टी को अवगत कराया गया। सूत्र बताते हैं कि उन ट्रस्टी ने गोपनीय ढंग से विभिन्न स्तरों पर पड़ताल कराई, लेकिन आशंका नहीं पुष्ट हुई तो यह माना गया कि दानराशि ही कम आ रही होगी। इसके बावजूद वित्तीय पारदर्शिता को लेकर कोई उपाय नहीं किए गए, न ही निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ की गई।

इससे चोरी में शामिल गणना कर्मियों का मनोबल बढ़ता गया और वे अधिक नकदी पार करने लगे। इधर, रामनवमी के बाद और गर्मी के दिनों में भी जब यह देखा गया कि दर्शनार्थियों की भीड़ में तो अधिक कमी नहीं दिख रही, फिर भी नकदी कम आ रही, तो अंदर ही अंदर जाल बिछाया गया। उन ट्रस्टी के समर्थकों ने टिन्नू यादव से नजदीकियां बढ़ाईं और सूचनाएं जुटानी शुरू की।

इस बीच देखा कि कोई काम या ड्यूटी न होने के बाद भी गणना कक्ष की ओर टिन्नू यादव का बेधड़क आना-जाना है, तो नजर रखी जाने लगी। जब यह सूचना मिली कि गणना में शामिल कुछ कर्मी ही चोरी में शामिल हैं, तो पांच जून को दाेपहर में अचानक ट्रस्टी को फिर जानकारी दी गई।

कक्ष से निकलते समय एक कर्मी की तलाशी कराई

वह कारसेवकपुरम से राम मंदिर परिसर पहुंचे और गार्ड बुलाकर गणना कक्ष से निकलते समय एक कर्मी की तलाशी करा दी, तो न केवल नोटों की गड्डियां मिल गईं, बल्कि उसकी निशानदेही पर बाथरूम में छिपाई नकदी भी मिल गई। सूत्र बताते हैं कि इससे तिलमिलाए ट्रस्टी ने सबके विरुद्ध एफआरआर की चेतावनी तो दे दी, लेकिन बाद में वह दबाव के आगे झुक गए।

फिर आंतरिक पड़ताल शुरू कराकर पूछताछ होती रही और धनराशि रिकवर की जाती रही। यहां तक कि वे ट्रस्टी भी आरोपितों के घर जाते रहे, जिनका करीबी टिन्नू बताया गया है। आराेपितों की गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उनसे बरामद 80 लाख की नकदी की जानकारी भी सार्वजनिक की है। हालांकि, बरामद रुपये इससे भी अधिक बताए गए हैं।

किसके इशारे पर डिलीट हुए फुटेज, यह अनुत्तरित

एसआइटी जांच से यह साफ है कि चढ़ावा चोरी के आरोपित टिन्नू यादव का गणना कक्ष तक बेरोकटोक आवागमन रहा। उसी के पास दानपात्रों की चाभियां भी रहती थीं और सीसी फुटेज से छेड़छाड़ भी हुई है। पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने भी काफी पहले यह बताया था कि ट्रस्टियों को सूचना दे देने पर टिन्नू यादव ने ही फुटेज डिलीट करा दी थी।

ऐसे में यह तो स्पष्ट हो रहा कि फुटेज को डिलीट कराया गया, लेकिन किसके कहने पर किया गया और इसमें उसका साथ किसने दिया, यह अभी तक अनुत्तरित है। सहयोग का आरोप उन पर भी लग रहे हैं, जिनका वर्षों बाद परिसर से सोमवार को तबादला किया गया है।