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तिलक लगाना अनिवार्य, गर्भगृह में मोबाइल भी बैन... राम मंदिर के अर्चकों के लिए सख्त नियम लागू

Published: Sat, 12 Sep 2026 11:02 AM (GMT+05:30)

राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति ने रामलला के अर्चकों के लिए नई नियमावली लागू की है। इसके तहत सेवाकाल ...और पढ़ें

राम मंदिर और राम मंदिर के भूतल पर विराजमान रामलला के भव्य विग्रह की आरती करते अर्चक

राम मंदिर और राम मंदिर के भूतल पर विराजमान रामलला के भव्य विग्रह की आरती करते अर्चक

HighLights

  1. अर्चकों के लिए सेवाकाल में तिलक लगाना अनिवार्य किया गया।

  2. पंचकेशी का पालन करना होगा, बाल-दाढ़ी, मूछ व शिखा रखना।

  3. गर्भगृह में मोबाइल के साथ प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर में विराजमान रामलला और अन्य देवों की सेवा-सुश्रूषा में संलग्न सभी अर्चकों के लिए अब सेवाकाल में परंपरानुसार तिलक लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही पंचकेशी का भी पालन करना होगा।

मतलब बाल-दाढ़ी, मूछ व शिखा को रखना होगा। गर्भगृह में मोबाइल के साथ प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा और सेवाकाल के समय मंदिर व्यवस्था, धर्मगुरु व आचार्यों के अतिरिक्त ट्रस्ट के कार्यकर्ता या सुरक्षाकर्मी से संपर्क, स्पर्श, चर्चा व बैठक नहीं कर सकेंगे। अर्चकों पर यह सख्ती ट्रस्ट की पुनर्गठित धार्मिक समिति ने की है। सभी 35 अर्चकों के साथ शुक्रवार को बैठक करके नई नियमावली को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

नई नियमावली में मंदिर की सीमा उल्लंघन पर पंचगव्य प्राशन अनिवार्य किया गया है। शौच जाने पर बिना स्नान किए किसी मंदिर या कोठार में प्रवेश वर्जित किया गया है। सेवाकाल के दौरान अर्चकों को निर्धारित सेवा स्थान पर रहना होगा। किसी आवश्यकता पर स्थान छोड़ने से पहले पाली प्रमुख के पास लिखित संदेश देकर कारण सहित बता कर जाना होगा।

हालांकि, इनमें से कई नियम पहले से मौखिक लागू रहे, लेकिन अब सभी अर्चकों को नियमावली देकर उल्लिखित 12 बिंदुओं का अक्षरशः पालन करने को कहा गया है। इसमें पुजारियों को निर्देश है कि वे धार्मिक समिति की ओर से निर्धारित पीतवस्त्र (अचला व उत्तरीय) पहनेंगे।

परिवर्तन की स्थिति में सूचना दी जाएगी। मर्यादित आचरण के लिए परस्पर बातचीत, क्रिया-प्रतिक्रिया, झुंड के रूप में चर्चा व हास-परिहास से दूरी रखना होगा। कोई घटना होने पर शांति से संभालने का प्रयास करके जिम्मेदार लोगों से सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त करना होगा।

कटुता के प्रदर्शन से बचना होगा। एक-दूसरे के संबंध सही या गलत की चर्चा संबंधित व्यक्ति से, अन्यथा अपने आचार्य से करनी होगी। किसी अन्य व्यक्ति या विभाग से नहीं। पाली प्रमुख का दायित्व व्यवस्था के संचालन में सहयोग रहेगा। अनावश्यक टिप्पणी या शासन का भाव नहीं प्रकट करना होगा।

किसी असहयोग या असंतुष्टि पर आचार्य को अवगत कराकर मार्गदर्शन लेना होगा। प्रतिदिन रोक-टोक से बचते हुए पाली की समाप्ति पर सारांश में सहयोगियों और व्यवस्था के संबंध में लिखित समीक्षा प्रस्तुत करनी होगी। पारिवारिक सदस्यों व इष्ट मित्रों के आगमन पर दर्शन, प्रसाद आदि का सहयोग आचार्य करेंगे अथवा वह निर्देश देंगे।

अन्य के साथ ऐसे सहयोग या व्यवहार के लिए अर्चक उत्तरदायी होंगे। सेवकों को पार्षद (सोना-चांदी व अन्य धातुओं के बर्तन) देने के पहले और स्वच्छता के बाद गिनती करनी होगी। जाने से पहले प्रत्येक पाली प्रमुख पार्षदों की संख्या को नियमित ग्रुप में अपडेट करेंगे। सभी पुजारियों को मंदिर व्यवस्था से उपलब्ध कराए गए भोग प्रसाद के अतिरिक्त बाहर का कोई भी सामान गर्भगृह में नहीं ले जाना होगा।

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ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य

  • अध्यक्ष : महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि
  • सदस्य : ट्रस्टी महांत दिनेंद्रदास, स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती व युगपुरुष परमानंद गिरि, महंत कमलनयन दास, आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण, राजकुमारदास और डा. रामानंददास।