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अयोध्या में रामलला का भव्य झूलनोत्सव: अर्चकों की ड्यूटी नहीं, सब अपनी श्रद्धा से करा रहे झूला विहार

Published: Tue, 25 Aug 2026 09:06 AM (IST)

अयोध्या के राम मंदिर में सावन शुक्ल तृतीया से झूलनोत्सव शुरू हो गया है, जिसमें सभी अर्चकों को रामलला को झूला झुलाने का समान अवसर मिल रहा है।

HighLights

  1. झूलनोत्सव सावन शुक्ल तृतीया से प्रारंभ, रक्षाबंधन तक चलेगा।

  2. सभी अर्चकों को रामलला को झूला झुलाने का समान अवसर।

  3. प्रतिदिन डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु कर रहे रामलला के दर्शन।

लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर के भूतल पर विराजमान रामलला का झूलनोत्सव सावन शुक्ल तृतीया तिथि से प्रारंभ हो गया है। अर्चक प्रतिदिन रामलला को स्वर्ण-रजत मिश्रित हिंडोले पर झूला विहार करा रहे हैं। इस बार श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने किसी अर्चक की ड्यूटी नहीं निर्धारित की है।

सभी अर्चकों को समान अवसर दिया जा रहा है। वह अपनी श्रद्धा व इच्छानुसार मंद-मंद गति से रामलला को झूला विहार करा रहे हैं। पूर्व से सेवा में संलग्न वरिष्ठ अर्चकों के साथ नए पुजारियों और धार्मिक समिति में शामिल साधु-संतों को भी अवसर मिल रहा है।

झूले पर विराजमान रामलला के दर्शन के लिए दर्शनार्थियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। अब प्रतिदिन एक-डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु रामलला सहित अन्य देवों के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।

सावन शुक्ल तृतीया तिथि झूलनोत्सव शुरू

रामलला का झूलनोत्सव पहले नागपंचमी (सावन शुक्ल पंचमी) के दिन से प्रारंभ होता था। इस बार ट्रस्ट की धार्मिक समिति ने रामनगरी की परंपरानुसार सावन शुक्ल तृतीया तिथि से झूलनोत्सव शुरू कराया है, इस कारण दो दिन और बढ़ गए हैं। हालांकि, यह रक्षाबंधन के दिन पूर्णिमा को ही समाप्त होगा।

पहले ट्रस्ट की ओर से रामलला की सेवा व पूजा-अर्चना की भांति झूला विहार में भी ड्यूटी लगाई जाती थी। इस बार सभी अर्चकों को समान अवसर देने के लिए किसी को प्रतिबद्ध नहीं किया जा रहा। अर्चक इच्छानुसार अपनी श्रद्धा से सेवा के दौरान समय निकाल कर झूला विहार करा रहे हैं।

नवोदित कलाकारों को भी मिल रहा अवसर

इसमें स्थानीय साधु-संत भी सहभागी बन रहे हैं। वह भी झूला विहार कराने के लिए राम मंदिर में पहुंचते हैं। प्रत्येक शाम को रामलला के गर्भगृह के समक्ष सांस्कृतिक संध्या सज रही, जिसमें ट्रस्ट की ओर से आमंत्रित कलाकार सावन गीत का गायन कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। नवोदित कलाकारों को भी अवसर दिया जा रहा है।

प्रतिदिन सुबह छह बजे होने वाली श्रृंगार आरती के पश्चात रामलला, उनके तीनों अनुजों और माता जानकी के चल विग्रहों को विधि-विधान से झूले पर विराजमान कराया जाता है। मध्याह्न में अल्प विश्राम के बाद पुन: हिंडोले पर विराजमान करके रात्रि साढ़े नौ बजे होने वाली शयन आरती तक झूला विहार कराया जा रहा है।

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