अयोध्या में औद्योगिक क्रांति को लेकर जागरण विमर्श में हुई चर्चा, उद्यमियों और विशेषज्ञों ने रखी अपनी बेबाक राय
अयोध्या में जागरण विमर्श के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास की संभावनाओं व चुनौतियों पर चर्चा हुई। उद्यमियों और विशेषज्ञों ...और पढ़ें

HighLights
उद्यमियों ने औद्योगिक विकास में सरकारी सहयोग की आवश्यकता बताई।
पर्यावरणविदों ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर चिंता व्यक्त की।
अयोध्या में फ्लोरीकल्चर और हार्टीकल्चर में अपार संभावनाएं।
विशाल शुक्ल, अयोध्या। जागरण विमर्श के चौथे सत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर व औद्योगिक विकास-संभावनाएं और चुनौतियां विषय पर उद्यमियों व पर्यावरण विद ने बेबाकी से अपनी बात रखी। सभी के उद्बोधन का मूल रहा कि अयोध्या को आने वाले समय के लिए तैयार रहना होगा, जिसमें सरकारों का बहुत बड़ा योगदान होगा।
चुनौतियां कम नहीं हैं लेकिन हम मिल कर काम करें तो उसका सामना आसानी से कर सकेंगे। 498 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद भगवान राम का दिव्य एवं भव्य मंदिर बन कर तैयार हो गया है, जिसके बाद अवसरों की कमी नहीं है।
अपने अंदाज के लिए मशहूर विश्व प्रकाश रूपन ने इस सत्र का बेहतरीन संचालन किया। प्रमुख उद्योगपति अविनाश चंद्रा ने अपने संघर्षों की कहानी सुनाते हुए कहा कि इंडस्ट्रियल क्षेत्र में सबको साथ मिलकर कार्य करना होगा, तभी कुछ संभव है। इंफ्रास्ट्रक्चर स्वयं विकसित करने के साथ सरकार को इसके लिए आगे आना होगा। भूमि, आवागमन का साधन, मार्ग व आर्थिक योगदान देना होगा।
उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की बात करते हुए कहा कि नये लोगों को आकर्षित करना होगा और उचित मूल्य पर उद्यमियों को छूट पर भूमि भी उपलब्ध करानी होगी। सरकार की योजनाएं अच्छी हैं लेकिन कहीं न कहीं थोड़ी कमी रह जाती है।
अच्छे निवेश की हैवी इंडस्ट्री की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि अयोध्या में 31 हजार लोग एमएसएमई में काम कर रहे हैं, और कुल 150 करोड़ का निवेश है और कागज पर आठ हजार 176 यूनिट पर है लेकिन वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा माहौल बनाना चाहिए कैसे उद्यमी और उद्यम आये। उसके लिए बहुत अच्छे रोजगार, अच्छे निवेश की हैवी इंडस्ट्री की आवश्यकता है।
कहा, अयोध्या में विकास की परियोजनाओं पर 85 हजार करोड़ खर्च बताया जाता है लेकिन यह पूछ लिया जाय कि उद्योग पर कितना खर्च किया तो आप को बहुत बड़ा छटका लगेगा। उन्होंने सवाल किया कि क्या हम ऐसी इंडस्ट्री नहीं लगा सकते, जिसमें 50 हजार लोगों को रोजगार मिले।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन अयोध्या चैप्टर के चेयरमैन सुमित जायसवाल ने कहा कि मंदिर निर्माण के बाद किसी को अयोध्या बताने की जरूरत नहीं पड़ती है। यह भी तय है कि अवसर आने ही है। इसके लिए अयोध्या को तैयार रहने की जरूरत है।
रिलांयस की कैंपा फ्रैक्ट्री, सीमेंट फैक्ट्री, कई बड़ी कंपनी इंडस्ट्रियल एरिया के बाहर चालू हो गई हैं लेकिन क्या विभाग उसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने वल्लभ भाई योजना का क्रियान्वयन अयोध्या से होना चाहिए, जिससे उद्यमियों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
डा. राममनोहर लोहिया अवध विवि के पर्यावरण विज्ञानी डा. विनोद चौधरी ने कहा कि चिंता के साथ योजनाएं भी हैं। चिंता- पर्यावरण में जब हम कभी प्राकृतिक तत्वों की बात करते हैं तो उनकी सीमाएं निर्धारित होती हैं। चाहे पानी, वायु या फिर भूमि हाे। अयोध्या में विकास का क्रम कितना बढ़ेगा, पता नहीं, लेकिन वायु और जल कितना उपलब्ध है यह हमें पता है और हम उसको नहीं बढ़ा सकते। प्राकृतिक तत्वों के ऊपर जो दबाव आने वाले समय में पड़ने वाला है।
इस चुनौती से हम कैसे निपटे, इसकी तैयारी हमें करनी होगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण विज्ञान विभाग के 40 लोगों की टीम 2021 से दो मानीटरिंग स्टेशन के माध्यम से वायु गुणवक्ता की निगरानी कर रहा है। पूरे जिले को 56 सेक्टर में बांट कर पानी की सेंपलिंग कराई जा रही है। इसी तरीके से अगले कुछ महीनों में ग्रिड मानीटरिंग के माध्यम से वाटर क्वालिटी की प्रोफाइलिंग कर देंगे।
यह भी पढ़ें- लखनऊ से शुरू होगा कश्मीर का सुहाना सफर: IRCTC के 'जन्नत-ए-कश्मीर' पैकेज में करें श्रीनगर-सोनमर्ग और गुलमर्ग की सैर
उन्होंने कहा कि पानी की बर्बादी रोकनी होगी। इस दिशा में चिंता करने की जरूरत हैं। गंगा नदी के किनारे बिजनौर से बलिया तक 480 से ऊपर ऐसे स्थल मिले जो सरकार के रिकार्ड में नहीं हैं और वहां अंतिम संस्कार होता है। पूरे सिस्टम में पानी का बार-बार प्रयोग हो रहा है। अयोध्या में चैलेंज और संभावनाएं दोनों हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में फ्लोरीकल्चर और हार्टीकल्चर का बहुत बड़ा स्कोप है। बाईपास पर एक वृक्ष रमरमा नाम का है। उसके छाल के नीचे राम नाम की आकृति निर्मित होती है।
यह भी पढ़ें- यूपी में भाजपा के नए जिला प्रभारियों की नियुक्ति, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने जारी की लिस्ट
वह उच्च औषधीय वृक्ष आंध्रा का है। क्यों न हम उसको राम के प्रसाद के रूप में सबको दें। उससे लोगों की भावनाएं भी जुड़ेंगी। उन्होंने कहा, अयोध्या में फूलों की मांग है। स्थानीय स्तर पर महज 10 प्रतिशत भी नहीं पूरी हो पा रही है। क्यों न हम इस क्षेत्र के किसानों के फ्लोरीकल्चर के लिए प्रोत्साहित करें, इससे व्यवसाय विकसित होगा। राममंदिर निर्माण के बाद अयोध्या जिस प्रगति की ओर जा रहा है, उससे हम भी जुड़ सकेंगे। इसके लिए नीतियां विकसित करनी होंगी।
