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अयोध्या में चार वन रक्षक और तीन वन दारोगा काट रहे मलाई, फील्ड के बजाय कार्यालय में कर रहे काम

Published: Tue, 08 Sep 2026 08:22 PM (GMT+05:30)

अयोध्या की वन रेंजों में वन रक्षकों की कमी है, जबकि प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में चार वन रक्षक और तीन वन दारोगा वर्षों से लिपिक का कार्य कर रहे हैं।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

जागरण संवाददाता, अयोध्या। जिले की पांचों रेंज वन रक्षकों की कमी का सामना कर रही हैं। इन रेंजों में पर्याप्त वन रक्षक न होने से काम प्रभावित हो रहा है, लेकिन अयोध्या वन प्रभाग कार्यालय में चार वन रक्षक और तीन वन दारोगा ऐसे है जो एक, दो, पांच नहीं कई वर्षों से कुर्सी से चिपके हुए हैं। इनसे इनके पद के अनुरूप कार्य न लेकर लिपिक का कार्य लिया जा रहा है।

इस मामले में प्रभागीय वनाधिकारी और वन संरक्षक के प्रभावी कार्रवाई न करने से उनकी कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठने लगा है। अब यह चर्चा प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से लेकर रेंजों में तैनात कर्मियों के बीच होने लगी है। एक ही पद पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप भी अधिकारियों पर लगने लगा है।

यह सभी जानते हैं कि वन रक्षक और वन दारोगा का कार्य फील्ड का है। इनकी ड्यूटी रेंज में बीट वार और पौधशालाओं में लगाई जाती है, लेकिन प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में तैनात वन रक्षक व वन दारोगा अधिकारियों के कृपा पात्र बने हैं।

इनमें वन रक्षक चंद्रभान वर्मा, अमर कुमार मिश्र, अर्पिता, रुचि पटेल और वन दारोगा राजाराम यादव, अवनीश पांडेय, सुभाष श्रीवास्तव का नाम शामिल हैं।

यह स्थिति तब है जब समय-समय पर मुख्यालय से अधिकारियों का यह आदेश आता है कि इनसे कार्यालय का कार्य न लेकर पद के अनुरूप ही कार्य लिया जाय।

बावजूद इसके मुख्यालय के आदेशों को दरकिनार कर इनसे वही कार्य लिया जा रहा, जो इनके पद के अनुरूप नहीं है। रेंजों से मिली जानकारी के अनुसार सदर में तीन, कुमारगंज में छह, बीकापुर में तीन और रुदौली में आठ वन रक्षकों की कमी है।

इस संबंध में जब प्रभागीय वनाधिकारी प्रखर गुप्त से दो बार बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उत्तर नहीं मिला। मुख्य वन संरक्षक सुमीर कुमार ने कहा कि वन रक्षकों की कमी पूरे प्रदेश में है, भर्ती हो रही है, जिसके बाद अलाटमेंट होगा। जहां तक इनसे कार्यालय में कार्य लेने की बात है तो वह डीएफओ का निर्णय है, जहां, जिससे काम लेना है, वह लेते हैं।

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