किसी ने दुकान खोई तो किसी की गई छत, आशियानों पर चला बुलडोजर, आपबीती बताते-बताते रो पड़े लोग
अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के विस्तारीकरण के लिए नाका हनुमानगढ़ी क्षेत्र में कई घरों और दुकानों को बिना नोटिस व मुआवजे के ध्वस्त कर दिया गया।
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HighLights
14 कोसी परिक्रमा मार्ग विस्तारीकरण के लिए घरों का ध्वस्तीकरण।
बिना नोटिस, मुआवजा या पुनर्वास के बेघर हुए परिवार।
प्रभावितों ने प्रशासन पर सुनवाई न करने का आरोप लगाया।
रविप्रकाश श्रीवास्तव, अयोध्या। शक्ति गुप्ता। कुछ घंटे पहले तक इनका पता नाका हनुमानगढ़ी के निकट लिखा जाता था, लेकिन चंद घंटों में इनका घर ध्वस्त होते ही पता भी जमींदोज हो गया। उनकी आंखों में आंसू हैं।
दुख इस बात का है कि पुनर्वास की बात तो दूर मकान एवं दुकान ध्वस्त करने से पहले इन्हें नोटिस तक नहीं दिया गया। वह अब बेघर हो चुके हैं। घर की अधिकांश वस्तुएं मलबे में दब गईं, जो बचा सके वह सामान खुले आसमान के नीचे पड़ा है।
आपबीती बताते-बताते वह रो पड़ते हैं। कहते हैं स्वजन बीमार हैं। 20 लाख रुपये का कर्ज उनके सिर पर है। बच्चों का पालन पोषण भी उन्हीं के ऊपर है। कैसे क्या होगा, कुछ समझ नहीं आ रहा। ऐसा ही दर्द अमरदीप का भी है। इनका भी मकान ध्वस्त करने से पहले नोटिस नहीं दिया गया। सुनवाई का अवसर तक नहीं दिया गया।
उनका आरोप है कि साढ़े दस मीटर नाप की बात कह कर उससे अधिक क्षेत्र में ध्वस्तीकरण किया गया, जो प्रभावित परिवारों के साथ धोखा है। ऐसी पीड़ा से गिरीश राजपाल और उनकी पत्नी सपना, मुरारी यादव, उमेश यादव, श्यामसुंदर यादव, अरविंद गुप्त व अमित सिंह भी गुजर रहे हैं।
कुछ ही घंटों में मलबे में बदली गृहस्थी
14 कोसी परिक्रमा मार्ग में किसी ने अपनी दुकान को खो दिया तो किसी के सिर से छत छिन गई। पीढ़ियों से रहते चले आ रहे इन परिवारों की गृहस्थी कुछ ही घंटों में मलबे में बदल गई, जिसके नीचे घरेलू सामान ही नहीं, उनके अरमान भी दब कर नष्ट हो गए।
14 कोसी परिक्रमा मार्ग विस्तारीकरण के लिए प्रशासन ने रविवार की रात नाका हनुमानगढ़ी क्षेत्र में कई परिवारों के आवासों पर बुलडोजर चला दिया। इन परिवारों के घरों को अतिक्रमण बताते हुए बिना किसी मुआवजे और समुचित सुनवाई के ध्वस्त कर दिया गया। लंबे समय से यहां रह रहे प्रभावित परिवार अब तनाव और अनिश्चितता के बीच जीवन जीने को विवश हैं।
परिक्रमा मार्ग के विस्तार क्षेत्र में आते थे आवास
प्रशासन का दावा है कि नजूल भूमि पर स्थित ये आवास परिक्रमा मार्ग के विस्तार क्षेत्र में आते थे। मार्ग को चौड़ा करने की प्रक्रिया के तहत निर्माण हटाए गए। हालांकि, प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इन घरों में रह रहे थे और उनके पास रहने का दावा था।
पूनम ने बताया कि शनिवार की देर रात डुग्गी पिटाई गई और रविवार से ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया। दुकान एवं घर के सामान निकालने का मौका तक नहीं दिया गया। सबसे बड़ी शिकायत मुआवजे और सुनवाई की कमी को लेकर है। अमनदीप सहित अन्य प्रभावितों का आरोप है कि मुआवजा तो दूर, पुनर्वास की कोई व्यवस्था भी अभी तक सामने नहीं आई है।
इन परिवारों के सामने कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। अब वे रिश्तेदारों के सहारे रहने को मजबूर हैं। बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय निवासी मुकेश सोनकर ने कहाकि प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह प्रभावितों की सुनवाई करे और मानवीय आधार पर उचित समाधान निकाले।
आधे घंटे का दिया समय
घर से सामान निकालने के लिए आधे घंटे का समय दिया गया। यह आरोप भी प्रभावितों ने लगाया है। सपना ने बताया कि उनकी बेकरी के उपकरण भी नष्ट हो गए हैं। शक्ति, अमरदीप, मुरारी यादव सहित अन्य प्रभावितों के घर की वस्तुओं को भी नुकसान पहुंचा है। अमित सिंह ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया है।
