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अयोध्या दीपोत्सव के 10वें संस्करण में पहली बार होगी 151 वर्ष पुरानी साहबगंज रामलीला, स्थानीय कलाकार करेंगे मंचन

Published: Fri, 06 Nov 2026 10:46 PM (IST)

इस वर्ष अयोध्या के 10वें दीपोत्सव में 151 वर्ष पुरानी साहबगंज रामलीला का पहली बार मंचन होगा। स्थानीय कलाकार सीएम ...और पढ़ें

दीपोत्सव के में पहली बार मंचित होगी 151 वर्ष पुरानी साहबगंज रामलीला।

दीपोत्सव के में पहली बार मंचित होगी 151 वर्ष पुरानी साहबगंज रामलीला।

HighLights

  1. 10वें अयोध्या दीपोत्सव में साहबगंज रामलीला का पहला मंचन।

  2. 151 वर्ष पुरानी रामलीला स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत होगी।

  3. मुख्यमंत्री और उपराष्ट्रपति के समक्ष सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन।

जागरण संवाददाता, अयोध्या। रामनगरी के 10वें दीपोत्सव में इस बार आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत का गौरव भी वैश्विक मंच पर नजर आएगा। दीपोत्सव में पहली बार अयोध्या की 151 वर्ष पुरानी साहबगंज रामलीला का मंचन किया जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ और उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के समक्ष स्थानीय कलाकार रामकथा के प्रसंगों का सजीव मंचन करेंगे।

विदेशी रामलीलाओं की प्रस्तुतियों के बीच स्थानीय रामलीला को स्थान देने की यह पहल रामनगरी की सांस्कृतिक पहचान को नई प्रतिष्ठा देने वाली है। दैनिक जागरण ने तीन नवंबर के अंक में इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

दीपोत्सव की तैयारियों की समीक्षा करने दो नवंबर को आए मुख्यमंत्री ने स्थानीय रामलीलाओं को भी मंच देने की अपेक्षा जताई थी। इसके बाद विभिन्न रामलीला मंडलियों की प्रस्तुतियों का अवलोकन कराया गया। इनमें से सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति के लिए साहबगंज रामलीला का चयन किया गया है।

डेढ़ शताब्दी से जीवंत है रामलीला की परंपरा

अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि रामनगरी में रामलीला की परंपरा का इतिहास काफी समृद्ध है। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षों से रामलीलाओं का मंचन होता आ रहा है। स्थानीय रामलीलाओं की प्रस्तुतियों का अवलोकन करने के बाद साहबगंज रामलीला को चुना गया है। यह अयोध्या की सबसे पुरानी रामलीला है और इस वर्ष इसका 151वां आयोजन हो रहा है।

केंद्रीय रामलीला कमेटी दुर्गा पूजा समिति के जिलाध्यक्ष मनोज जायसवाल ने बताया कि दशहरे के दौरान अयोध्या शहर में लगभग 200 स्थानों पर रामलीला का मंचन होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह परंपरा पीढ़ियों से आगे बढ़ रही है। साहबगंज रामलीला ने 151 वर्षों की निरंतरता के साथ अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। दीपोत्सव के मंच पर इसकी प्रस्तुति स्थानीय कलाकारों के लिए भी गौरव का अवसर होगी।

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