अयोध्या के जिला अस्पताल में 'लाल खून का काला धंधा', दलाल मजबूर मरीजों को ऊंचे दाम में बेचते थे ब्लड
अयोध्या के जिला अस्पताल में खून के काले धंधे का खुलासा हुआ है, जहाँ दलाल मरीजों के तीमारदारों से ऊँचे दाम पर खून बेचते थे।
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कई मामलों में बीमार और नशेड़ी व्यक्तियों से भी खून लिया गया, जिससे रामनगरी की छवि धूमिल हुई है।
HighLights
जिला अस्पताल में खून के काले धंधे का पर्दाफाश हुआ।
दलाल मरीजों के तीमारदारों से ऊँचे दाम पर रक्त बेचते थे।
बीमार और नशेड़ी व्यक्तियों से भी खून लेने के मामले।
प्रमोद दुबे, जागरण अयोध्या। लखनऊ में खून बेचकर शौक पूरा करने वाले इंजीनियरिंग छात्रों का प्रकरण सामने आने के बाद एक बार फिर रामनगरी चर्चा में आ गई। यहां जिला अस्पताल में जड़ जमाये दलालों का गिरोह लाल खून के काले धंधे से रामनगरी को कलंकित करता रहा। इसका राजफाश पहली बार वर्ष 2023 में एक बीमार और नशे के आदी व्यक्ति द्वारा तीन माह में सात बार ब्लड डोनेशन होने के बाद हुआ। इसके बाद इस सिलसिले ने थमने का नाम नहीं लिया।
जून और दिसंबर 2025 में दो बार सात हजार रुपये में ब्लड बेचने का मामला सामने आया। इसमें महिला अस्पताल में भर्ती एक प्रसूता और जिला अस्पताल में भर्ती किशोरी के तीमारदार की मजबूरी देख रुपये वसूल कर ब्लड उपलब्ध कराया गया। इसमें एक प्रकरण में कोतवाली नगर में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था, जबकि अन्य में जांच कमेटी तक ही प्रकरण सीमित रह गया।
फरवरी 2023 में दलालों ने लालकुर्ती निवासी गंभीर बीमारी से ग्रसित एक युवक का तीन माह में सात बार जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड डोनेट करा दिया। युवक के साथ में गया दूसरा व्यक्ति ब्लड लेकर चला जाता रहा। उसके जाने के बाद परीक्षण में गंभीर बीमारी होने के कारण रक्त अनुपयुक्त पाया जाता था। प्रकरण की जांच तत्कालीन सीएमएस डॉ. सीबीएन त्रिपाठी ने समिति का गठन कर कराई तो युवक ने बयान के बाद कई लोगों के नाम सामने आये थे, जो सात हजार रुपये में रोगियों और तीमारदारों को एक यूनिट ब्लड उपलब्ध कराते रहे।
जून 2025 में सात हजार में मिला था ब्लड
अयोध्या निवासी अरविंद ने आरोप लगाया था कि उनकी भाभी रीना का रुदौली के खैरनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव हुआ। रक्त की कमी होने पर महिला अस्पताल रक्त चढ़वाने के लिए भेजा गया। चिकित्सक ने उन्हें दो यूनिट ए प्लस ब्लड लाने के लिए पर्चा और सैंपल दिया।
ब्लड बैंक के पास अरविंद को दो दलाल मिल गये और हजार रुपये में एक यूनिट ब्लड उपलब्ध कराने की बात कही। अरविंद ने डोनर न होने से मजबूरी में उनके मोबाइल पर सात हजार रुपये ऑनलाइन भेज दिये। ब्लड लेकर अस्पताल पहुंचने पर मरीज के लिए बगैर डोनर ब्लड की व्यवस्था होने की जानकारी मिली। इसकी शिकायत तत्कालीन सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बानियान से की तो जांच कराकर मुकदमा पंजीकृत करा दिया।
दिसंबर 2025 में भी सात हजार लेकर दिलाया ब्लड
रामनगर अमावासूफी निवासी शगुन जिला अस्पताल में भर्ती थीं। चिकित्सक ने ब्लड लाने की सलाह दी। बड़ी बहन ने ब्लड बैंक में एक यूनिट ब्लड का निवेदन किया, लेकिन डोनर न होने पर मना कर दिया गया। ऐसे में एक दलाल ने सात हजार रुपये में ब्लड उपलब्ध करा दिया। शिकायत सीएमएस से हुई तो जांच में अस्पताल के ही एक पूर्व सुरक्षाकर्मी का नाम सामने आया था।
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