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अनुकल्प मिश्र निकला मास्टरमाइंड, 3300 टेक्स्ट मैसेज के जरिए रची गई थी राम मंदिर चढ़ावा चोरी की साजिश

Published: Thu, 24 Sep 2026 08:25 AM (IST)

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी की साजिश 3300 टेक्स्ट मैसेज के जरिए रची गई थी, जिसमें अनुकल्प मिश्र मुख्य आरोपी हैं।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अनुकल्प निकला मास्टरमाइंड।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अनुकल्प निकला मास्टरमाइंड।

HighLights

  1. चढ़ावा चोरी की साजिश 3300 टेक्स्ट मैसेज से रची गई।

  2. अनुकल्प मिश्र मुख्य साजिशकर्ता, टेक्स्ट मैसेज से करता था बात।

  3. टिन्नू यादव के पास थीं दानपात्रों की चाबियां, करता था गड़बड़ी।

प्रहलाद तिवारी, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी का षड़यंत्र का बुनने के लिए मैनुअल के साथ-साथ डिजिटल तकनीक का भी भी आरोपितों ने उपयोग किया। चोरी की साजिश टेक्स्ट मैसेज के जरिए बुनी जाती थी। इस प्रकरण में 90 दिनों बाद दाखिल हुए आरोपपत्र में यह रहस्योद्घाटन हुआ है।

पुलिस ने उन सभी टेक्स्ट मैसेज को आरोप पत्र का हिस्सा बनाया है। मुख्य साजिशकर्ता बताए गए अनुकल्प मिश्र की आरोपित अविनाश व लवकुश से बात टेक्स्ट मैसेज के जरिए होती थी। इन लोगों के बीच लगभग 3300 मैसेज पुलिस ने सर्विलांस सेल के माध्यम से प्राप्त किए हैं।

इन संदेशों को रिकवर करने में सर्विलांस सेल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। टेक्स्ट मैसेज से वार्ता करने का तरीका भी इनके शातिर दिमाग की करतूत था। फोन पर बात करना असुरक्षित होने के कारण आरोपितों ने टैक्स मैसेज के जरिये बातचीत का सिलसिला शुरू किया। ताकि सर्विलांस के जरिये उनकी बातचीत पकड़ी न जा सके।

पहले खेल, फिर जेल और बाद में बेल

चढ़ावा चोरी मामला खुलने के बाद जब जांच तेज हुई तब भी तीनों आरोपित आपस में टेक्स्ट मैसेज के जरिए बात करते थे। अपने रिश्तेदार लवकुश के एक मैसेज का जवाब देते हुए अनुकल्प ने लिखा कि पहले खेल, फिर जेल और फिर होगी बेल। यह मैसेज पुलिस के आरोपपत्र में भी शामिल है।

टिन्नू के पास रहती थीं दानपात्रों की चाभियां

आरोपपत्र में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय के चालक रहे टिन्नू यादव द्वारा श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर रुपये लेने और फिर उन रुपयों से आभूषण खरीदने की बात कही गई है।

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी औपचारिक आदेश के दानपात्रों की चाभियां थीं। मंदिर से जुड़े संपर्कों और प्रभाव का इस्तेमाल करता था। उसने ही अपने भतीजे मनीष को मंदिर में नौकरी दिलवा कर गणना कक्ष में रखवाया था।

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