संवाद सूत्र, ककोर: जनपद में शासन द्वारा लाखों रुपए खर्च करने के बाद सौ शैय्या में टीबी अस्पताल का महीनों पहले निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। लेकिन अभी तक चालू नहीं हो पाया है। जिसके कारण तड़पते टीबी मरीजों को मजबूरन सैफई और कानपुर के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिले में ऐसे मरीजों को भर्ती करने के बाद उपचार के लिए कोई वार्ड नहीं है। जिससे मरीज व उनके घर वालों को परेशानियां उठानी पड़ती हैं।

दिबियापुर थाना क्षेत्र के गांव हर्राजपुर निवासी कालका प्रसाद 55 वर्ष ने बताया कि उसे गत कई महीनों से टीबी जैसी बीमारी हो गई है। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई है। उपचार के लिए डाक्टरों ने दिबियापुर से जिला अस्पताल के लिए भेज दिया। एम्बुलेंस वाले ने सौ शैय्या अस्पताल चिचौली में भर्ती करा दिया लेकिन वहां भी कोई उपचार नहीं किया गया है। जहां से सैफई के लिए रेफर कर दिया गया है। जबकि गंभीर हालत में बीमार कालका प्रसाद व उसके घर वाले कहते रहे कि यहीं भर्ती कर लो लेकिन टीबी मरीजों का अलग वार्ड नहीं होने से एक नहीं सुनी गई और रेफर का कागज थमा दिया गया। यह मामला मात्र बानगी है। गरीब इलाज मौजूद होने के बावजूद उससे दूर हैं। उन्हें बाहर रेफर होने पर इलाज के अलावा होने वाले खर्च की खातिर कर्ज तक लेना पड़ जाता है। जिले में कोई भी टीबी का स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं है। जिसके चलते गंभीर मरीजों को मजबूरन रेफर किया जाता है। वैसे सौ शैय्या अस्पताल में चार बेड आरक्षित हैं। जो क्षय रोग के अस्पताल का निर्माण हुआ है वह जल्द ही शुरू किया जाएगा। अवधेश राय, सीएमओ

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