औरैया के लाल दिव्यांश कश्यप ने राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया मान, 'वेट अम्ब्रेला होल्डर' के अनोखे मॉडल से बनाई पहचान
औरैया के दिव्यांश कश्यप ने अपने 'वेट अम्ब्रेला होल्डर' नवाचार से 12वीं राष्ट्र स्तरीय इंस्पायर-मानक प्रदर्शनी में राष्ट्रीय पहचान बनाई ...और पढ़ें
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HighLights
दिव्यांश ने 'वेट अम्ब्रेला होल्डर' से राष्ट्रीय स्तर पर मान बढ़ाया।
नवाचार गीली छतरियों से फर्श पर पानी फैलने से बचाता है।
बचपन से ही दिव्यांश को स्क्रैप से उपकरण बनाने का शौक।
जागरण संवाददाता, औरैया। गांव रामपुर बैहारी का उच्च प्राथमिक विद्यालय ही नहीं बल्कि बेसिक शिक्षा विभाग व गांव का हर परिवार व झोपड़ी में गुजारा करने वाले लोग गौरवान्वित हैं। उनका हक भी है, क्योंकि उनके बीच पले पुसे दिव्यांश कश्यप जिसने बचपन में खेल-खेल में ही साउंड सिस्टम, गत्ते की बाडी तैयार कर कूलर बनाकर आश्चर्यचकित कर दिया। अब अपने नवाचार ‘वेट अम्ब्रेला होल्डर’ से राष्ट्रीय स्तर पर स्थान बनाकर जनपद और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 12वीं राष्ट्र स्तरीय इंस्पायर-मानक प्रदर्शनी एवं प्रोजेक्ट प्रतियोगिता में ‘वेट अम्ब्रेला होल्डर’ के माध्यम से प्रदेश व गांव का मान बढ़ाकर लौटे दिव्यांश के स्वागत में विद्यालय व गांव का हर परिवार पलकें बिछाए बैठा था। ढोल-नगाड़े वाले भी सबसे तेज आवाज के लिए तैयार रहे। गुरुवार सुबह से ही उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुर बैहारी में उत्सव जैसा दृश्य था। नवरात्र महापर्व पर परिसर में विराजमान ज्ञान की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा पर गांव की मां बेटियां पुष्प भेंटकर दिव्यांश के गले में पुष्पहार पहनाकर आशीर्वाद दे रही थीं।
इस उपलब्धि पर दिव्यांश के मार्गदर्शक शिक्षक प्रह्लाद सिंह व विमला शुक्ला सहित बच्चे खुशी से झूमते नजर आए। इस मौके पर बाबा रामलखन, ताऊ चंद्रमोहन, ताई नीलम, अनुपम, स्वागिता, विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुरेश चंद्र , नारायण दास तिवारी, मीना, तिलक सिंह, मोहित, सागर, राजू चक्रवर्ती, श्रीपति नारायण पाल आदि शामिल हुए। विद्यालय से गांव तक हर चौखट पर लोग दिव्यांश को आशीर्वाद देने के लिए लालायित थे।
यह दौर दोपहर बाद तक जारी रहा। स्टेट रिसोर्स ग्रुप के सुभाष रंजन द्विवेदी ने विद्यालय पहुंचकर छात्र दिव्यांश को सम्मानित किया। इसी बीच दिव्यांश के परिवार से हुई बातचीत के कुछ अंश इस प्रकार हैं-
बचपन में ही स्क्रैप से उपकरण बनाने की ललक
दिव्यांश की मां मालती बताती है कि बचपन में ही ऐसी ही हरकतें रहती थीं। कूड़ा कबाड़ में पड़ी वस्तुओं से उपयोगी सामान निकालकर जोड़-तोड़ करता रहता था। ट्रांजिस्टर से तार व मोटर आदि निकाल कर साउंड सिस्टम तैयार किया। उसके बाद गत्ता की बाडी बनाकर छोटा कूलर बनाकर चालू किया।
इस बीच वह बाजार से कुछ सामान लाने के लिए पैसे भी मांगता। चूंकि मजदूरी के काम में पैसे नहीं भी होते लेकिन उसका हौसला रखने के लिए इधर-उधर से करके पैसा देती थी। यही बात शिक्षक प्रहलाद सिंह व विमला शुक्ला ने भी बताई दिव्यांश का दिमाग नवाचार में ज्यादा रहता है।
दोस्त के फिसलकर घायल होने से मिली प्रेरणा
श्री राधाकृष्ण इंटर कालेज में अध्ययनरत कक्षा 10 के छात्र दिव्यांश बताते हैं कि वर्ष 2024 में जब वह उच्च प्राथमिक विद्यालय की कक्षा आठ का छात्र था। एक दिन बरसात में एक छाता का पानी टपकन से साथी मोनू फिसलकर गिर गया और उसके हाथ में फ्रेक्चर हो गया।
बस यही घटना ‘वेट अम्ब्रेला होल्डर’ यंत्र बनाने की प्रेरणादायक रही। कास्ट आयरन से तैयार माडल ने जो उपलब्धि दिलाई। इसका श्रेय मेरे माता-पिता व शिक्षकों को हैं। जिनके मार्गदर्शन में यहां तक पहुंच सका। हमारी चाहत है कि इसी तरह का आशीर्वाद मां व गुरुजनों का बना रहे।
फर्श पर पानी फैलने की समस्या का समाधान
गीली छतरी रखने के लिए एक विशेष ‘वेट अम्ब्रेला होल्डर’ बनाया गया है। यह बहु उद्देशीय छतरी स्टैंड का कार्यशील माडल है। छतरी रखने के लिए होल्डर व स्टैंड, पानी एकत्र करने के लिए टैंक, सुखाने के लिए पंखे लगाए गए हैं। नीचे बैटरी रखने के लिए सुरक्षित कंपार्टमेंट बनाया गया है। सभी भागों को एक मजबूत वेसमेंट है।
टपकने वाला पानी नीचे लगे जल संग्रह पात्र में इकट्ठा होगा। पंखों की सहायता से छतरी पर लगी नमी को कम करके उसे जल्दी सुखाने का प्रयास किया गया है। इससे फर्श पर पानी फैलने व फिसलन की समस्या को कम करने में सहायता मिलेगी। भविष्य में सेंसर और सौर ऊर्जा जैसी तकनीकों को जोड़कर इसे और उपयोगी बनाया जा सकता है।
