औरैया में भावुक कर देने वाला पल...7 बेटियों ने बारी-बारी से दिया मां की अर्थी को कंधा, छोटी ने दी मुखाग्नि
औरैया के दिबियापुर में सात बेटियों ने अपनी मां कृष्णा देवी के अंतिम संस्कार में बेटे का फर्ज निभाया, बारी-बारी ...और पढ़ें

HighLights
सात बेटियों ने मां की अर्थी को कंधा दिया
सबसे छोटी बेटी सोनी ने मां को मुखाग्नि दी
रूढ़िवादी सोच तोड़ बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज
संवाद सूत्र, दिबियापुर(औरैया)। समाज में बेटियों को लेकर सदियों से चली आ रही रूढ़वादी सोच को पीछे छोड़ क्षेत्र में सात बेटियों ने अपनी मां के अंतिम संस्कार में बेटे का फर्ज निभाया। अंतिम संस्कार के लिए ले जाई जा रही मां की अर्थी को सातों बेटियों ने बारी-बारी से कंधा दिया। घाट पर छोटी बेटी ने मां को मुखाग्नि दी। मां के प्रति बेटियों के इस भावनात्मक कार्य की हर किसी ने सराहना की।
कस्बे के दुर्गा नगर निवासी 59 वर्षीय कृष्णा देवी की सात बेटियां है। उनके कोई बेटा नहीं है। शनिवार सुबह उनका निधन हो गया। सातों बेटियों ने बारी-बारी से मां को कंधा दिया। श्मशान घाट पहुंचने पर मुखाग्नि देने की बात सामने आई तो परिवार और ग्रामीणों के बीच चर्चा हुई। इसके बाद सबसे छोटी बेटी सोनी सविता ने मां की चिता को मुखाग्नि देने का निर्णय लिया।
बड़ी बहनों ने भी उसके फैसले का समर्थन किया। अंतिम संस्कार की सभी रस्मों में सातों बेटियां शामिल रहीं। बेटियों के इस निर्णय की ग्रामीणों ने भी सराहना की और कहा कि बेटियों ने अंतिम समय में मां के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी कर समाज को भावनात्मक संदेश दिया।
स्वजन ने बताया कि कृष्णा देवी के पति रामकिशोर सविता फौज में थे। रिटायर होने के कुछ साल बाद उनका निधन हो गया था। मुहल्ले के लोगों ने बताया गया कि पति के अंतिम संस्कार के समय भी परिवार को कोई बेटा नहीं था, इसलिए रिश्तेदार की मदद ली गई थी। पति की मौत के बाद कृष्णा देवी ने अपनी सातों बेटियों का पालन-पोषण किया।
बेटियों को पढ़ाने-लिखाने और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। परिवार के अनुसार कृष्णा देवी काफी समय से बीमार चल रही थीं। उनकी बेटियां मिलकर इलाज और घर के खर्च की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। सबसे छोटी 25 वर्षीय बेटी सोनी सविता मायके में रहकर मां की देखभाल कर रही थी। सोनी के पति आगरा में निजी नौकरी करते हैं।
