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Tigri Ganga Mela 2026: इस बार बदलेगा तिगरी मेले का स्वरूप, श्रद्धालुओं के लिए 400 बीघा जमीन पर सजेंगे तंबू

Published: Sat, 31 Oct 2026 06:29 PM (IST)

इस वर्ष तिगरी गंगा मेले का स्वरूप बदला हुआ दिखेगा, जिसमें श्रद्धालुओं और किसानों के लिए 400 बीघा रेतीली जमीन ...और पढ़ें

गजरौला तिगरी मेले के लिए नाव के झूले का सामान पहुंचा। सौ ग्रामीण

गजरौला तिगरी मेले के लिए नाव के झूले का सामान पहुंचा। सौ ग्रामीण

HighLights

  1. पिछले साल के मुकाबले बदला मेले का स्वरूप

संवाद सहयोगी, गजरौला (अमरोहा)। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध तिगरी गंगा मेले में इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले स्वरूप बदला हुआ नजर आएगा। गंगा मैया की भक्ति, आस्था और श्रद्धा के इस पावन मेले में इस बार लंबाई और चौड़ाई बढ़ने से किसानों और श्रद्धालुओं को अधिक जगह मिलने की उम्मीद है।

करीब 400 बीघा रेतीली जमीन तंबू लगाने के लिए उपलब्ध होगी। इससे किसानों को अपनी पसंद के अनुसार तंबू लगाने में सहूलियत मिलेगी। पिछले वर्ष मेले का क्षेत्रफल अपेक्षाकृत कम होने के कारण किसानों को पर्याप्त रेतीली जमीन नहीं मिल पाई थी।

ऐसे में कई श्रद्धालुओं को पक्के स्थानों पर अपने तंबू लगाने पड़े थे। किसानों की पहली पसंद गंगा किनारे की रेतीली जमीन होती है, जहां वे परिवार के साथ तंबू लगाकर मेले का आनंद लेते हैं। इस बार मेले का दायरा बढ़ने से उन्हें राहत मिलने की संभावना है।

मेले की व्यवस्था के तहत सेक्टर-12 के बाद किसानों को तंबू लगाने के लिए रेतीली जमीन उपलब्ध होगी। मुरादाबाद मंडल के किसान बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर अपने तंबू लगाते हैं और गंगा मैया के दर्शन-पूजन के साथ मेले की परंपराओं में भाग लेते हैं।

तिगरी गंगा मेले का धार्मिक महत्व होने के साथ ही यह किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आपसी मेल-मिलाप तथा मनोरंजन का भी प्रमुख अवसर है। मेले की तैयारियां लगातार प्रगति पर हैं।

व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और मेले को व्यवस्थित रूप देने के लिए तैयारियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, मेले में मनोरंजन के साधन भी पहुंचने लगे हैं। नाव के आकार वाले झूले आने से मेले में रौनक बढ़ने की उम्मीद है।

बारिश और गंगा के जलस्तर से गीली है मिट्टी

बारिश और पहले गंगा का जलस्तर अधिक रहने के कारण मेला क्षेत्र की मिट्टी अभी पूरी तरह सूख नहीं पाई है। इससे तैयारियों के दौरान कुछ परेशानियां सामने आ रही हैं।

गीली मिट्टी के कारण कार्यों में दिक्कत हो रही है, लेकिन तैयारियां लगातार जारी हैं। अब सभी की निगाहें मेले के आयोजन पर टिकी हैं, जहां गंगा मैया की जय-जयकार, भक्ति और आस्था के बीच श्रद्धालु पुण्य लाभ लेने पहुंचेंगे।

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