गजरौला : कोरोना की आशंका में क्वारंटाइन सेंटर में समय गुजार रहे श्रमिक घर जाने को बेताब हैं। उन्हें एक-एक मिनट वहां ठहरना, समय-काटना भारी पड़ रहा है। चूंकि बेड पर लेटे रहना, खाना-पीना और सो जाना ही उनकी दिनचर्या बन गया है। वह इससे जल्दी छुटकारा चाहते हैं, लेकिन क्वारंटाइन की समय अवधि की बंदिश उन्हें जकड़े हुए है।

गजरौला में नेशनल हाईवे किनारे संजीवनी अस्पताल को क्वारंटाइन अस्पताल बना रखा है, यहां गुरुवार की रात तक 72 लोग क्वारंटाइन किए हुए थे, लेकिन शुक्रवार को 44 लोगों को यहां से छुट्टी देकर घर भेज दिया। इन सभी की कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट निगेटिव आई है। अब यहां सिर्फ 28 लोग बचे हुए हैं। अधिकांश वह श्रमिक हैं, जो गुजरात के अहमदाबाद से लौटे हैं। चूंकि बाहर से लौटने वाले श्रमिक कोरोना पॉजिटिव भी पाए जा रहे हैं। इसी अंदेशे में इन्हें क्वारंटाइन कर यहां रखा गया है। वैसे अस्पताल में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। खाने-पीने से लेकर सभी तरह की सुविधाएं है, लेकिन उन्हें यहां समय काटना मुश्किल हो रहा है। अपने मोबाइल के सहारे समय काट रहे हैं। बाकी सभी जरूरी सुविधाएं वह मुहैया होने की बात कह रहे हैं। हम यहां तीन से हैं। किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। आराम से रह रहे हैं लेकिन समय काटना मुश्किल हो रहा है। बस यह बता दीजिए कि घर कब जाएंगे या यहां कितने दिन और रहना पड़ेगा।

मौसीन। खाने-पीने को दोपहर व शाम में अच्छा मिल रहा है। क्वालिटी भी खाने की ठीक होती है, लेकिन समय गुजारने के लिए मनोरंजन के हिसाब से यहां कुछ नहीं है। इसी कारण ठहरने में परेशानी महसूस हो रही है।

चांद मियां। बिजली-पानी की भी कोई दिक्कत नहीं है। सुबह में बिस्कुट के साथ चाय मिलती है। आज दोपहर के खाने में चावल-दान, फुल्का, गोभी, सलाद व गुड़ मिला था, क्वालिटी भी ठीक थी। मोबाइल चलाकर समय पास कर रहे हैं।

सुहैल खां। यहां तीन दिन से ठहरे हुए हैं। इससे पहले अमरोहा अस्पताल में हैं। यहां खाने-पीने की परेशानी नहीं है, लेकिन घर जाने के बारे में नहीं बताया जा रहा है। हम सभी लोग अहमदाबाद में स्टील फर्नीचर का काम करते थे। लौटने पर क्वारंटाइन कर दिया है।

शमशुददीन ।

Posted By: Jagran

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