'लाशों के ढेर लांघकर निकला, वो सेना नहीं माफिया है...': रूस में जंग के बीच फंसे यूपी के लाल ने सुनाई खौफनाक दास्तान
अमरोहा के फतेहपुर छितरा निवासी अक्षय कुमार ने रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे से अपने भाई को एक भयावह व्हाट्सएप मैसेज ...और पढ़ें

रूस में अपने मित्रों के साथ अक्षय और भाई अमन को भेजा गया मैसेज का स्क्रीन शाट स्रोत स्वजन
HighLights
रूसी कमांडर पर मानव ढाल बनाकर माइंस वाले रास्तों पर भेजने का लगाया आरोप
अक्षय द्वारा सवा महीने पूर्व भाई को भेज वाट्सएप मैसेज से रूसी सेना अधिकारियों की कार्यशैली का चला पता
नवीन वर्मा, मंडी धनौरा (अमरोहा)। रूस में लापता ग्राम फतेहपुर छितरा निवासी अक्षय कुमार को लेकर एक सनसनीखेज व कलेजा कंपा देने वाला खुलासा हुआ है। पिछले कई दिनों से लापता अक्षय ने किसी तरह छिपकर अपने भाई अमन को एक विस्तृत वाट्सएप मैसेज भेजा था। इसमें उसने रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे की जो दास्तान बयां की है, उसे सुनकर किसी की भी रूह कांप उठे।
अक्षय ने लिखा है कि वह मौत के मुंह से निकलकर वापस लौटा है और रूसी सेना कोई फौज नहीं, बल्कि आतंकवादियों और माफिया की तरह काम कर रही है। रूसी सेना में भर्ती होने के बाद 30 जुलाई को अक्षय ने अपने भाई को वाट्सएप पर एक लंबा चौड़ा मैसेज भेजा है।
इसमें रूसी सेना में भर्ती हो रहे विदेशियों की स्थिति का पता चल रहा है। भाई को भेजें मैसेज में अक्षय ने कहा है कि ट्रेनिंग के तुरंत बाद पांच-पांच भारतीय युवाओं के ग्रुप बनाकर सीधे युद्ध के अग्रिम मोर्चे पर भेज दिया गया।

रास्ते में रूसी सैनिकों ने उनका खाना छीन लिया व केवल पानी की बोतलें छोड़ीं। दलदल भरी नदियों व जंगलों से पैदल गुजरते समय कई साथी दलदल में समा गए। जबकि आसपास दर्जनों सड़ती हुई लाशें बिछी थीं।
यूक्रेन के 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाले घातक ड्रोन लगातार हमला कर रहे थे। अमरोहा के लाल ने बताया था कि कमांडर खुद 60 किलोमीटर पीछे सुरक्षित बंकरों में बैठकर केवल टेलीफोन व ड्रोन से निर्देश देते थे।
भारतीयों को जबरन ऐसे रास्तों पर भेजा जाता था जहां विस्फोटक बिछी होती थीं, ताकि यह पता चल सके कि रास्ता सुरक्षित है या नहीं। एक ड्रोन हमले में अक्षय के पैर में गोलियां व माइंस के छर्रे लगे, जबकि उसका साथी की मौके पर ही मौत हो गई थी।
घायल अक्षय ने तीन दिनों तक किसी तरह जान बचाई। स्वजन को फोन करने से रोकने के लिए रूसी कमांडर डीजल, तोगुल आदि ने सभी भारतीय युवकों के मोबाइल, पासपोर्ट व एटीएम कार्ड पहले ही छीन लिए थे।
अक्षय ने मैसेज में बताया कि वह इस वक्त एक गुप्त जगह पर छिपा हुआ है और वहां से चोरी-छिपे यह मैसेज भेजा है। उसने सरकार से गुहार लगाई है कि उसे किसी भी कीमत पर उस नर्क से निकाला जाए, क्योंकि कमांडर उसे दोबारा मौत के मुंह में धकेलने की तैयारी कर रहे हैं।
जली चाॅकलेट और गंदे नाले का पानी पीकर बचाई जान
रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर अक्षय कुमार का संघर्ष रोंगटे खड़े कर देने वाला है। बमबारी में घायल होने के बाद जब उसे कमांडरों ने तड़पता हुआ छोड़ दिया, तो उसके सामने सांसें बचाए रखने की चुनौती थी।
अक्षय ने बताया कि बमबारी में उसका साथी मारा गया और वह भी जख्मी हो गया। भीषण गर्मी और दर्द के बीच पीने का पानी खत्म हो गया था।
जान बचाने के लिए उसने बहते गंदे नाले से बोतल में पानी भरा और दो दिनों तक वही दूषित पानी पीकर प्यास बुझाई। भोजन न होने पर एक मृत सैनिक के बैग से मिली जली हुई चाकलेट खाकर उसने अपनी जान बचाई।
पासपोर्ट तैयार, वीजा का इंतजार
रूस में लापता अक्षय कुमार का कोई सुराग न मिलने और कूटनीतिक स्तर पर हो रही देरी के बाद परिजनों का सब्र टूट चुका है। अपने लाल को सुरक्षित वापस लाने के लिए अब परिवार खुद रूस जाने की तैयारी में जुट गया है।
अक्षय के पिता रणवीर सिंह और बड़े भाई अमन ने अपना पासपोर्ट बनवा लिया है और रूस जाने के लिए वीजा हेतु आवेदन भी कर दिया है। परिजनों का कहना है कि वे हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठ सकते। यदि प्रशासनिक मदद नहीं मिलती, तो वे खुद रूस की धरती पर जाकर अक्षय को खोजेंगे।
