जोया : मां-बाप मजदूरी करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी फिर भी दीपक को पढ़ाई की ललक थी। जैसे ही समय मिलता वह खुद भी मजदूरी करता था। इससे न सिर्फ परिजनों को मदद मिलती बल्कि अपनी पढ़ाई का खर्च वह खुद उठा लेता था। रविवार को भी छुट्टी होने के कारण दो दिन की मजदूरी पर आया था ताकि कुछ राहत मिल जाएगी। परंतु गरीबी ने मजदूर मां-बाप के घर का दीपक हमेशा के लिए बुझा दिया। हादसे में जवान बेटे की मौत से दीपक के परिजन बदहवास हैं।

सोमवार रात हाईवे पर हुए हादसे में मृतक दीपक के साथ ही अन्य नौ घायल युवक मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के मुहल्ला नूर नगर के रहने वाले हैं। यहां पर रहने वाले नरेश कुमार के परिवार में पत्नी मिथलेश के अलावा दो बेटे दीपक व ¨प्रस हैं। नरेश व मिथलेश मजदूरी करते हैं। तब जाकर घर का खर्चा चलता है। गरीबी के इस हालत में भी नरेश व मिथलेश दोनों बेटों को पढ़ाने में पीछे नहीं हैं। बड़ा बेटा दीपक आईटीआई प्रथम वर्ष का छात्र था। वह खुद भी मजदूरी करता था। पढ़ाई के खर्च के लिए वह गरीब मां-बाप पर बोझ नहीं था।

छुट्टी होने व कालेज के बाद मिलने वाले समय में दीपक मजदूरी करता था। अपना खर्च निकालने के साथ ही वह गरीब मां-बाप को भी सहारा दे रहा था। चूंकि छोटा भाई ¨प्रस अभी काफी छोटा है, लिहाजा दीपक ही मां-बाप का सहारा था। रविवार को भी छुट्टी होने के कारण दीपक डीजे के साथ मजदूरी करने आया था ताकि कुछ आमदनी हो जाए परंतु होनी को कोई नहीं टाल सकता। हादसे में दीपक की मौत हो गई।

जवान बेटे की मौत की सूचना मिलने पर अन्य घायलों के परिजनों के साथ दीपक के माता-पिता भी रोते-बिलखते पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। दोनों बदहवास थे। दोनों जवान बेटे को याद कर बिलख रहे थे। पिता नरेश कुमार ने बताया कि उसे कई बार गरीबी का हवाला देकर पढ़ाई बीच में रोकने के लिए कहा था लेकिन उसे पढ़ने की ललक थी। मुझे भी सहारा देता था। मेहनत मजदूरी कर अपनी पढ़ाई का खर्च खुद निकाल लेता था। सुबकते हुए कहा गरीबी ने उसके घर का दीपक बुझा दिया।

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