गजरौला : इन दिनों गर्मी पूरी तरह से यौवन पर है। ऐसी स्थिति में हर कोई बिजली से राहत की आस में है लेकिन, बिजली विभाग भी सितम ढाने में पीछे नहीं है। भले ही ग्रामीण व शहरी क्षेत्र को 24 घंटे बिजली मुहैया कराने का दावा किया जाता हो मगर, धरातल पर देखा जाए तो अवाम पसीने से तर-बरतर है। बिजली की आपूर्ति से सिर्फ विभागीय कागजात ही रोशन हो रहे हैं।

बिजली विभाग के मुताबिक गजरौला क्षेत्र में छोटे-बड़े 11 बिजलीघर बने हुए हैं। इनके माध्यम से शहर व ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में आपूर्ति सप्लाई होती है। यूं तो शहर व ग्रामीण क्षेत्र में 24 घंटे बिजली सप्लाई के आदेश है मगर, बिजली कंट्रोल रूप से रोस्टिग होने की वजह से शहर को 21 घंटे आपूर्ति दी जा रही है और ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली सप्लाई हो रही। यह विभागीय कागजों में दर्ज है। इसलिए कागजात रोशन हैं।

गांव व शहर में रहने वाले लोगों की जुबानी सुनेंगे तो वह बिल्कुल विपरीत है। उनका कहना है कि न ही तो शहर में लोगों को 21 घंटे आपूर्ति मिल रही है और न ही गांवों में 18 घंटे। सिर्फ कागजों में आपूर्ति चल रही है। बिजली विभाग के एसडीओ विभोर शर्मा ने बताया विभाग द्वारा शहर व ग्रामीण क्षेत्र को रोस्टिग के अलावा पूरी आपूर्ति दी जा रही है। इसके अलावा गांव जलालपुर में एक नया बिजली घर भी चालू होने वाला है। जिससे आठ-दस गांवों में राहत मिलेगी। गांव में बिजली की स्थिति बेकार है। गर्मी के सितम के बीच बिजली विभाग भी लोगों पर रहम नहीं बरत रहा है। गांव के लोग आम के बाग आदि बगैरा में बैठकर गर्मी से बचने का प्रयास कर रहे हैं। शेडयूल के हिसाब से आपूर्ति नहीं मिल रही है।

सुशील सैनी, गांव नगलिया मेव। भले ही बिजली विभाग के कागजों में आपूर्ति पूरी मिल रही हो लेकिन, गांवों में स्थिति ठीक नहीं है। एक तार टूटने पर भी कई-कई घंटे तक बिजली नहीं पहुंचती है। तार भी जर्जर हैं। आपूर्ति भी शेडयूल से नहीं मिल रही है।

वाशिद अफरीदी, गांव टोकरा पट्टी। दिन में कई बार बिजली आती-जाती है। जिसकी वजह से गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। इसके बारे में बिजली विभाग के कर्मचारियों से भी शिकायत करते हैं। मगर, कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। गांव में बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।

जाबिर हुसैन, गांव फौंदापुर।

ट्रांसफार्मर पर एक तार टूट जाता है तो उसे जोड़ने में तीन दिन लग जाता है। ऐसे में गांव के लोगों का गर्मी के मारे बुराहाल हो जाती है। गांव में व्यवस्था व्यवस्था बेहतर नहीं है। जबकि बिलों के नाम पर खूब खानापूर्ति हो रही है।

डॉ. इशरत अली, गांव सिकरी खादर। कुछ समय पूर्व ट्रांसफार्मर फुंक गया था। उसे ठीक करने में काफी समय लगा। इसके बाद अब फिर से गांव में बिजली व्यवस्था गड़बड़ा रही है। दिन में कई-कई बार बिजली भागती है। फाल्ट होने पर भी काफी समय बाद बिजली पहुंची है।

औसाफ अली, गांव पपसरा खादर। शहर में बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के औने-पौने बिल निकालकर खूब मनमानी की जाती है। लेकिन, आपूर्ति देने में फिसड्डी है। शेडयूल के हिसाब से लोगों को आपूर्ति भी नहीं मिल रही है। फाल्ट होने पर पूरी-पूरी रात बिजली गुल रहती है।

प्रदीप शर्मा, मंडी समिति मार्ग।

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