गजरौला : गांव चौबारा में जिन लोगों ने अपनों को खोया है। उनके दिन में बड़ा दर्द छिपा है। जरा सा जिक्र किया तो बोले, इलाज में पैसे लुटाकर भी अपनों को नहीं बचा पाए। गांव में अभी भी 30 से अधिक लोग जिदगी-मौत से जूझ रहे हैं। क्योंकि न तो शहर में बेहतर इलाज मिल रहा है और न ही सरकारी अस्पताल में चिकित्सक देख रहे हैं। नतीजन, लोग अपने घरों में ही देसी नुस्खों व गांव के चिकित्सकों से इलाज करवा रहे हैं।

शहर से लगभग छह-सात किमी दूरी पर बसे 15 सौ से अधिक आबादी वाले गांव चौबारा का हाल कुछ ऐसा ही है। यहां पर पिछले एक माह के अंदर 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी हैं। जबकि 30 से ज्यादा लोग अभी भी बीमार है। इतना होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से बेखबर है। निजी व सरकारी अस्पतालों में इलाज न होने की वजह से लोग गांव व आसपास के चिकित्सकों से इलाज कराने के लिए मजबूर है। गांव में कई स्थानों में गंदगी भी है। नालियों का पानी सड़क पर बह रहा है।

गांव के रहने वाले बिटटू यादव ने बताया कि उनकी चाची की हालत बिगड़ने पर 30 अप्रैल की रात लगभग आठ बजे नगर मुहल्ला फाजलपुर में स्थित जनहित अस्पताल में भर्ती कराया। पांच-छह घंटे अस्पताल में भर्ती कर ऑक्सीजन लगाई। मगर, उनकी जान नहीं बची। अस्पताल वालों ने पांच घंटे में छह हजार रुपये वसूले। कमोवेश गांव में अन्य बीमारी से मरने वाले लोगों से भी निजी चिकित्सकों ने ऐसे ही अनाप-शनाप वसूली की। मगर, वह भी अपनों की जिदगी नहीं बचा पाए।

उधर, प्रधान भाग्यवती ने बताया गांव में सैनिटाइजर व साफ-सफाई का कार्य कराया जा रहा है। हां, पूर्व में लगातार मौतें हुई है लेकिन, अब न तो कई दिन मौत हुई और लोगों की हालत ज्यादा नाजुक नहीं है। कुछ लोग बुखार आदि बीमारी से पीड़ित जरूर हैं। उधर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कुछ दिनों पूर्व नवादा गांव में टीम भेजकर लोगों की कोरोना जांच करवाई गई थी। एक बार फिर से टीम भेज दी जाएगी।

उधर, जनहित अस्पताल के संचालक ऋषिपाल सिंह ने बताया कि हमारे यहां पर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। हो सकता है कि किसी मरीज की हालत नाजुक स्थिति में देखकर भर्ती कर लिया हो मगर, निर्धारित पैसे ही वसूले जा रहे हैं।

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