बावनखेड़ी नरसंहार: 18 साल बाद गांव लौटा सलीम, सफेद कुर्ता-पजामा और हाथ में पेंसिल... पहचानना हुआ मुश्किल
बावनखेड़ी नरसंहार का दोषी सलीम 18 साल बाद अपनी बहन की शादी के लिए सात दिन की पैरोल पर गांव ...और पढ़ें

सलीम के घर के बाहर तैनात पुलिस और मिलने के लिए पहुंचे लोग
HighLights
18 वर्ष बाद बावनखेड़ी लौटे सलीम को देखने को हर कोई उत्सुक
जागरण संवाददाता, हसनपुर (अमरोहा)। कोतवाली क्षेत्र के गांव बावनखेड़ी में मास्टर शौकत अली के परिवार के सात लोगों के चर्चित हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद प्रयागराज की नैनी जेल में बंद सलीम को बहन की डोली रुखसत करने के लिए सात दिन के पैरोल पर गांव लाया गया है। पेरोल की शर्तों के मुताबिक वह पुलिस की कड़ी सुरक्षा में है।
घर के एक कमरे में शर्तों के मुताबिक चार-चार लोगों को मिलवाया जा रहा है। प्रयागराज पुलिस बुधवार रात 10 बजे सलीम को लेकर कोतवाली पहुंची।
कोतवाली में आमद कराने के बाद प्रयागराज से साथ आए दारोगा समेत चार पुलिस कर्मियों के साथ हसनपुर कोतवाली से भी बावनखेड़ी हल्का पर तैनात दारोगा श्रीपाल यादव के साथ महिला कांस्टेबल समेत चार पुलिस कर्मियों को सुरक्षा में लगाया गया है।
सलीम के पिता अब्दुल रऊफ और माता चमन जहां के मुताबिक बचपन में सलीम की गोद में खेली छोटी बहन आयशा से अधिक प्यार रहा है। उसकी डोली अपनी नजरों के सामने और अपने हाथों से रुखसत करने के लिए वह पैरोल पर आया है।
25 अक्टूबर को सलीम की बहन आशा की हसनपुर से बरात आ रही है।सलीम का कहना है कि वह पैरोल की शर्तों का पूरी तरह से पालन करते हुए साथ आए सुरक्षा कर्मियों के दिशा निर्देश पर ही अपना पैरोल पूरा करेगा।
18 वर्ष में पूरी तरह बदल गया सलीम
14/15 अप्रैल 2008 की रात को प्रेमिका शबनम के साथ मिलकर कला विषय के शिक्षक शौकत अली के परिवार के सात सदस्यों की हत्या में जिस समय सलीम जेल गया था उसे समय वह नवयुवक था।
बुधवार रात जब वह पुलिस के सुरक्षा घेरे में कोतवाली पहुंचा तब वह काफी परिपक्व लग रहा था। सफेद कुर्ता पजामा और जेब पर पेंसिल लगी हुई थी। प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र सरोहा और पुलिस कर्मियों से बातचीत में वह बहुत समझदारी की बातें करता हुआ दिखाई दिया।
