विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बेटे के कातिलों को सजा दिलाने के लिए चार साल में 60 बार अदालत पहुंची 65 साल की मां, आरोपियों को हुई उम्रकैद

Published: Tue, 06 Oct 2026 12:33 PM (GMT+05:30)

अमरोहा की 65 वर्षीय शकुंतला देवी ने अपने बेटे ओमकार के हत्यारों, बहू नीतू और उसके प्रेमी आरिफ को उम्रकैद की सजा दिलाने के लिए चार साल तक संघर्ष किया।

शकुंतला

शकुंतला

HighLights

  1. 65 वर्षीय मां ने बेटे के हत्यारों को सजा दिलाई।

  2. बहू नीतू और प्रेमी आरिफ को उम्रकैद की सजा।

  3. चार साल तक 60 तारीखों पर पहुंचकर न्याय पाया।

संवाद सूत्र, अमरोहा। बुढ़ापे का इकलौता सहारा छिन जाने का दर्द क्या होता है, यह शहर के मुहल्ला सुभाष नगर निवासी 65 वर्षीय शकुंतला देवी से बेहतर कोई नहीं समझ सकता।

चार साल पहले उनकी बहु नीतू और उसके प्रेमी आरिफ ने उनके बेटे ओमकार की बेरहमी से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इस असहनीय दुख के बावजूद इस बुजुर्ग मां ने हार नहीं मानी और कातिलों को उम्रकैद की सजा दिलाकर ही चैन की सांस ली।

अदालत द्वारा शनिवार को जब मृतक ओमकार की पत्नी नीतू और उसके प्रेमी आरिफ को उम्रकैद व 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई, तो मां शकुंतला देवी की आंखों से आंसू छलक पड़े। लगभग चार साल तक चले इस मुकदमे में करीब 60 तारीखें पड़ीं।

मेहनत रंग लाई और न्याय मिला

हर तारीख पर शकुंतला देवी अपने बड़े बेटे ओमप्रकाश के साथ न्यायालय पहुंचती थीं। बढ़ती उम्र व शारीरिक कमजोरी के बावजूद उन्होंने न्याय की इस लड़ाई में कभी हिम्मत नहीं हारी। इस पूरे मामले में शकुंतला देवी ही मुख्य प्रत्यक्षदर्शी गवाह थीं, जिनकी दृढ़ता व गवाही कातिलों को सजा दिलाने में निर्णायक साबित हुई।

21 अक्टूबर 2022 की रात जब तार से गला घोंटे जाने पर ओमकार चीखा, तो माँ शकुंतला देवी ही दौड़कर कमरे में पहुंची थीं। उन्होंने आरिफ को भागते व बहु नीतू को वहां देखा था। उन्होंने ही आगे आकर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई। शुरुआती दौर में हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई, लेकिन मां की अटूट गवाही व साक्ष्यों के सामने दोषियों का झूठ बेनकाब हो गया।

यह खबर एक मां के अटूट ममता व कभी न झुकने वाले संकल्प की मिसाल है। एक तरफ जहां बेटे की निर्मम हत्या का गम था, वहीं दूसरी तरफ कातिल घर की बहु ही निकली।

इन गहरे जख्मों को सीने में समेटे शकुंतला देवी का चार साल तक न्याय के लिए संघर्ष करना और अंततः जीत हासिल करना हर किसी के दिल को झकझोर देता है। उनका कहना है कि आखिर उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें न्याय मिल गया है। जिससे उनके बेटे की आत्मा को भी शांति मिलेगी।

यह भी पढ़ें- पपीते की खेती से बंपर कमाई कर रहा महराजगंज का किसान, दूर-दूर से खरीदने पहुंच रहे व्यापारी, देखें ऐसा क्या है खास?