बीमा कंपनी को देना होगा चोरी हुए ट्रक का क्लेम, नहीं चलेगा देरी से सूचना का बहाना: उपभोक्ता आयोग
उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को अमरोहा निवासी तस्लीम के चोरी हुए ट्रक के लिए 14.73 लाख रुपये ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है।

जागरण संवाददाता, अमरोहा। ट्रक चोरी होने के बाद बीमा कंपनी को सूचना देने में हुई सात दिन की देरी को आधार बनाकर बीमा दावा खारिज करना कंपनी को भारी पड़ गया। उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के दावे को निरस्त करने के फैसले को गलत ठहराते हुए पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया है।
आयोग ने बीमा कंपनी को ट्रक की बीमित राशि 14.73 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत अदा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 15 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये भी देने होंगे।
यह है पूरा मामला
मामला अमरोहा नगर निवासी तस्लीम के ट्रक चोरी होने से जुड़ा है। ट्रक का संबंधित बीमा कंपनी से बीमा था। इसकी पालिसी 19 मई 2019 से 18 मई 2020 तक वैध थी। वाहन की घोषित बीमित कीमत 14.73 लाख रुपये थी।
तस्लीम के अनुसार 30 नवंबर 2019 की रात ट्रक जोया में खड़ा था। सुबह ट्रक गायब मिला। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना देने का प्रयास किया, लेकिन उस समय रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। बाद में 10 दिसंबर 2019 को डिडौली थाने में वाहन चोरी की प्राथमिकी दर्ज हुई।
बीमा कंपनी को छह दिसंबर 2019 को चोरी की सूचना देकर क्लेम दर्ज कराया गया। पुलिस ने काफी तलाश के बाद भी ट्रक बरामद नहीं होने पर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अमरोहा ने 10 फरवरी 2021 को अंतिम रिपोर्ट स्वीकार कर ली।
इसके बाद बीमा कंपनी ने पुलिस रिपोर्ट और चोरी की सूचना देने में हुई देरी को आधार बनाकर बीमा दावा निरस्त कर दिया। मामले में निर्णायक मोड़ तब आया, जब तस्लीम ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत पुलिस कंट्रोल रूम से जानकारी मांगी।
11 मई 2023 को मिली सूचना में सामने आया कि एक दिसंबर 2019 की सुबह डायल-112 पर ट्रक चोरी होने की सूचना दी गई थी। उपभोक्ता आयोग ने इस सूचना को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। आयोग ने कहा कि पीड़ित ने घटना की जानकारी पुलिस को समय से दे दी थी।
एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी का दोष शिकायतकर्ता पर नहीं डाला जा सकता। आयोग ने कहा कि चोरी की घटना की जानकारी पुलिस को तत्काल देना महत्वपूर्ण है। जब पुलिस को समय से सूचना दे दी गई थी तो केवल बीमा कंपनी को सूचना देने में हुई देरी के आधार पर वास्तविक चोरी के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।
आयोग ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि चोरी हुए वाहन पर किसी बैंक या फाइनेंसर का ऋण बकाया है तो अवार्ड की धनराशि पर पहला अधिकार संबंधित बैंक या फाइनेंसर का होगा। ऋण की राशि चुकाने के बाद बची धनराशि शिकायतकर्ता को दी जाएगी।
