बिहार में लेडी डॉक्टर को 60 दिनों में देना होगा 20 लाख मुआवजा, उपभोक्ता आयोग ने गर्भवती की मौत पर सुनाया फैसला
बिहार राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक गर्भवती महिला की मौत के मामले में चिकित्सकीय लापरवाही के लिए डॉक्टर बिमला शाही पर 20 लाख रुपये का मुआवजा लगाया है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
गर्भवती महिला की मौत पर डॉक्टर को 20 लाख मुआवजा।
बिहार राज्य उपभोक्ता आयोग ने चिकित्सकीय लापरवाही मानी।
पुरानी रिपोर्ट पर इलाज, गंभीर शिकायतें नजरअंदाज की गईं।
जागरण संवाददाता, पटना। गर्भवती महिला की गंभीर हालत को नजरअंदाज कर केवल पुरानी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर इलाज करने के मामले में बिहार राज्य उपभोक्ता आयोग ने चिकित्सकीय लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए महिला डॉक्टर पर 20 लाख रुपये का मुआवजा लगाया है।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने डॉक्टर को मृतका के पति को 60 दिनों के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देने होंगे। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
मामला छपरा के भगवान बाजार स्थित भूमिजा चिकित्सा केंद्र का है। शालू जैन गर्भावस्था के दौरान पेट में तेज दर्द और गर्भस्थ शिशु की हलचल बंद होने की शिकायत लेकर डॉक्टर बिमला शाही के पास पहुंची थीं।
आरोप था कि डॉक्टर ने शारीरिक जांच किए बिना पुरानी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर सब कुछ सामान्य बता दिया। 6 अक्टूबर 2013 को जब शालू फिर गंभीर पीड़ा में डॉक्टर के पास पहुंचीं तो उनकी शिकायत को कथित तौर पर गंभीरता से नहीं लिया गया।
डॉक्टर ने उन्हें दवा लेने की सलाह देकर वापस भेज दिया। इसके बाद हालत बिगड़ने पर उन्हें पटना के फोर्ड अस्पताल ले जाया गया।
वहां जांच में पता चला कि गर्भस्थ शिशु की पहले ही मौत हो चुकी थी और संक्रमण फैलकर सेप्टीसीमिया की गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी।
11 अक्टूबर को हुई थी मौत
इलाज के दौरान 11 अक्टूबर को शालू की मौत हो गई। आयोग ने माना कि मरीज की गंभीर शिकायतों के बावजूद चिकित्सकीय जांच और आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई।
पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में डॉक्टर को तत्काल नया अल्ट्रासाउंड अथवा विशेषज्ञ की राय लेनी चाहिए थी। आयोग ने ‘रेस इप्सा लोक्विटुर’ के सिद्धांत को लागू करते हुए चिकित्सकीय लापरवाही के लिए डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराया और मुआवजे का आदेश दिया।
