अमरोहा में स्वास्थ्य विभाग मेहरबान, मरीजों की जान से खेल रहे झोलाछाप; सील के बाद फिर खुल रहे अवैध अस्पताल
अमरोहा में केवल 130 पंजीकृत नर्सिंग होम हैं, जबकि हजारों अवैध रूप से चल रहे हैं, जहाँ अप्रशिक्षित लोग मरीजों ...और पढ़ें

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HighLights
जिले में पंजीकृत महज 130 नर्सिंग होम-क्लीनिक, अवैध संचालित कई गुने
जागरण संवाददाता, अमरोहा। जिले में महज 130 नर्सिंगहोम -क्लीनिक पंजीकृत हैं। मगर हजारों की संख्या में अवैध रूप से संचालित है। जिसमें अन्ट्रेंड ही गर्भवतियों के आपरेशन से प्रसव करने से लेकर गंभीर मरीजों का इलाज कर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिससे आए दिन मरीजों की जान जा रही है। इन्हें स्वास्थ्य विभाग का खुला संरक्षण प्राप्त है।
इसके बदले हर माह कुछ चिकित्सकों की जेब गर्म की जा रही है। खानापूर्ति के लिए कोई घटना होने के बाद ही अवैध नर्सिंगहोम को सील करने की कार्रवाई की जाती है।
रहरा, जोया, हसनपुर में अवैध नर्सिंगहोम में प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत इसका उदाहरण है। सीएमओ डा. रमाकांत सागर ने बताया कि अभियान चलवाकर अवैध नर्सिंगहोम व क्लीनिकों को बंद कराया जाएगा।
निजी अस्पताल-क्लीनिक संचालन के लिए सीएमओ कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आवेदन जरूरी है। रजिस्ट्रेशन के आवेदन में अधिकृत चिकित्सक की डिग्री, अग्निशमन व बायोमेडिकल वेस्ट की एनओसी, निजी या किराए की बिल्डिंग का शपथ पत्र लगाया जाता है।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी जांच पड़ताल के बाद ही अस्पताल का रजिस्ट्रेशन देती है। मगर कुछ लोग चिकित्सकों को आनकाल दिखाकर रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में 130 नर्सिंग होम-क्लीनिक पंजीकृत है।
मगर इसमें खास बात यह है के इससे कई गुने अवैध नर्सिंगहोम-क्लीनिक अवैध रूप से संचालित है। जिनमें कोई भी चिकित्सक नहीं है। लेकिन नर्सिंगहोम के बोर्ड में बड़े-बड़े विशेषज्ञ चिकित्सकों के नाम अंकित करा रखे हैं।
इसके भ्रम में मरीज फंसकर अपना इलाज कराता है। इन अस्पताल में स्वयं अन्ट्रेंड ही गर्भवतियों के आपरेशन से प्रसव कराने से लेकर अन्य गंभीर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इनको सीधे स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।
इसके बदले हर माह उनकी जेब गर्म की जा रही है। अवैध अस्पताल में कोई घटना व हंगामा होने पर भी खानापूर्ति के लिए अवैध नर्सिंगहोम व क्लीनिक संचालक के खिलाफ कार्रवाई होती है।
उदाहरण के लिए पिछले दिनों जोया के कादिर हेल्थ केयर हास्पिटल में प्रसव के दौरान गर्भवती की मौत, रहरा के अवैध वरदान नर्सिंग होम में गर्भवती की हालत बिगड़ने पर रैफर के दौरान मौत, हसनपुर का रियाज नर्सिंग होम में मंगलवार की रात मौत, अमरोहा, धनौरा के कई अवैध नर्सिंग होम इसका उदाहरण हैं।
आगे-आगे बंद-पीछे खोल दी जाती हैं अवैध नर्सिंग होम सील
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी माह से अब तक करीब 125 से अधिक अवैध नर्सिंगहोम-क्लीनिक छापेमार कार्रवाई के दौरान बंद किए है।
लेकिन हैरत की बात यह है के सील के एक-दो दिन बाद ही संचालकों से साठगांठ कर सील खोल दी गई है। डीएम व एसडीम के हस्तक्षेप पर कार्रवाई के नाम पर भी महज करीब संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
