अमरोहा में बड़ा खेल: 132 अवैध अस्पताल सील, फिर भी 'मौत का लाइसेंस' देकर खोल दिए गए क्लिनिक!
अमरोहा में स्वास्थ्य विभाग ने 132 अवैध नर्सिंग होम-क्लीनिक सील किए, लेकिन अधिकांश को बाद में फिर से खोल दिया ...और पढ़ें

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HighLights
कोई घटना होने के बाद ही उच्चाधिकारियों के आदेश पर ही खानापूर्ति के लिए 30 पर कराई प्राथमिकी दर्ज
जागरण संवाददाता, अमरोहा। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले जनवरी माह से अब तक छापामार अभियान के दौरान करीब 132 अपंजीकृत नर्सिंगहोम-क्लीनिकों को सील कर चुका है, मगर खानापूर्ति के लिए मुश्किल से करीब 30 के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। यह वह अस्पताल हैं जिनमें कोई घटना हो चुकी है और उच्चाधिकारियों ने कार्रवाई के हस्तक्षेप किया था।
हैरत की बात यह है कि इस बीच सभी अवैध अस्पतालों को धीरे-धीरे वैद्य करके खुलवा दिया गया। जिससे मरीजों की मौत का सिलसिला जारी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में करीब 130 निजी अस्पताल-क्लीनिक पंजीकृत हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि इससे कई गुने अवैध अस्पताल-क्लीनिक संचालित हैं। जिनका विभाग के कुछ चिकित्सकों का गठजोड़ है और उनकी हर माह जेब गर्म होती है। जिसके कारण उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है।

अस्पताल में कोई घटना व उच्चाधिकारियों से शिकायत के बाद ही खानापूर्ति के लिए कोई कार्रवाई होती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी माह से अब तक अवैध अस्पताल-क्लीनिक संचालकों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर गौर करें तो छापामार कार्रवाई के दौरान करीब 132 अवैध अस्पताल-क्लीनिकों को सील कर संचालकों को नोटिस जारी किया गया था।
लेकिन विडंबना है कि इनमें से केवल 30 अस्पताल-क्लीनिक संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। बाकी को धीरे-धीरे मौत का लाइसेंस देकर वैध कर दिया गया।
डिडौली क्षेत्र में कादिर हेल्थ केयर, हसनपुर में वरदान, रियाज नर्सिंग होम, संभल रोड उझारी स्थित अमान हास्पिटल, रहरा का नर्सिंगहोम होम, संभल रोड ढक्का स्थित सिमरन हेल्थ क्लीनिक, हसनपुर में कमला हास्पिटल, सिहाली जागीर का आसिफ जीवन क्लीनिक आदि तमाम ऐसे अस्पताल शामिल हैं।
इसमें उच्चाधिकारियों के आदेश पर अभियान चलाकर सील किया गया। सीएमओ डा. रमाकांत सागर ने बताया कि जितने भी अवैध नर्सिंग होम-क्लीनिक चल रहे हैं या जिन्हें अनाधिकृत रूप से वैध किया गया है। उनके खिलाफ अभियान चलाकर बंद कराया जाएगा।
पंजीकृत लैब महज 15, नमूना कलेक्शन गली-गली
जिले में केवल 15 पैथोलाजी लैब पंजीकृत हैं। लेकिन मुहल्ले और गली-गली में हजारों की संख्या में पैथोलाजी लैब संचालित हैं। जिसमें वह मरीजों की उल्टी सीधी रिपोर्ट बनाकर उनसे मोटी रकम वसूल रहे हैं।
इनका सीधे अवैध अस्पताल व क्लीनिक संचालकों से गठजोड़ है। जिसमें वह मरीजों को जांच कराने के लिए इन अवैध पैथाेलाजी लैब में भेज रहे हैं।
वहां उल्टी सीधी जांच रिपोर्ट तैयार कर मरीजों को गुमराह करते हैं। जिससे वह अवैध अस्पतालों में इलाज को पहुंच रहे हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग सबकुछ जानने के बावजूद अपनी आंखे मूंदे हुए हैं।
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