1 महीने में 4 बार फागिंग और फर्जी रिबोर! e-Gram Swaraj से खुला 5.50 करोड़ के पंचायत घोटाले का सच
अमरोहा की 576 ग्राम पंचायतों में हैंडपंप रिबोर, सैनिटाइजर और फागिंग के नाम पर तीन माह में 5.50 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

एआई इमेज है।
HighLights
ग्राम पंचायतों ने तीन माह में खर्च कर डाले 5.50 करोड़, अन्य कार्यों की उपेक्षा
ई-स्वराज पोर्टल पर कामों की जांच के दौरान सामने आई सच्चाई, होगी जांच
राहुल शर्मा, अमरोहा। हैंडपंप रिबोर न मरम्मत और सैनिटाइजर खरीदारी। 576 ग्राम पंचायतों के प्रशासकों को यह तीन काम ही सबसे जरूरी लगे। उन्होंने 5.50 करोड़ की रकम इन्हीं काम में खर्च कर डाली। वह भी सिर्फ तीन माह में ही। शिकायतों पर अफसरों ने ई-स्वराज पोर्टल (खर्च की फीडिंग वाला) खंगाला तो ऐसी सच्चाई सामने आई।
आशंका है कि ग्राम पंचायतों के प्रशासक और सचिवों ने आपस में साठगांठ कर सरकारी खजाने में जमकर सेंधमारी की है। हैरान करने वाली बात यह भी है कि चुनिंदा फर्मों से ही काम करवाए गए और उनके बिलों का प्रयोग किया गया।
जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) नितिन कुमार ने बताया कि पंचायतों में तीन कामों पर निकाली गई करोड़ों की रकम को लेकर गड़बड़ी की आशंका है, इसकी जांच के लिए एडीओ को निर्देशित किया है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर भी सत्यापन कराया जा रहा है।
26 मई, 2026 को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर इन्हें ही प्रशासक नियुक्त किया गया। नियमत: पंचायतों में नए काम कराने के लिए पहले कार्यों का प्रस्ताव बनाना होगा और फिर डीपीआरओ को उपलब्ध कराना होगा।
इसके बाद डीपीआरओ प्रस्ताव को अनुमति के लिए डीएम के पास भेजेंगे। डीएम की अनुमति के बाद ही पंचायतों में कार्य किए जाएंगे। लेकिन, जिले में ऐसा नहीं किया गया।
ई-स्वराज पोर्टल की जांच में पता चला कि पिछले तीन माह में पंचायतों में फागिंग भी मानक से ज्यादा दिखाकर 2.20 करोड़ रुपये खर्च दिखाए। कुछ ग्राम पंचायतों ने एक महीने में चार-चार बार फागिंग दिखाई।
सैनिटाइजर छिड़काव के नाम पर 80 लाख रुपये से अधिक की धनराशि निकाली गई। जबकि सैनिटाइजर छिड़काव होता ही नहीं। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग की ओर से होने वाली फांगिग में ही सैनेटाइजर खर्च दिखाने का मामला सामने आ चुके हैं।
वहीं, हैंडपंप रिबोर के नाम पर 2.50 करोड़ रुपये निकाले गए। सभी ग्रामों में एक-एक महीने में एक से अधिक बार रिबोर हुए। अधिकारी भी मानते हैं कि इन कामों में गड़बड़ी संभव है।
इसकी दो वजह हैं। पहला, कम बजट होने व आवश्यक काम दिखाकर प्रशासन व सचिव धनराशि निकालकर सीधे खर्च कर सकते हैं। नियमानुसार 20 हजार रुपये तक खर्च के लिए डीएम से अनुमति नहीं लेनी होती है।
दूसरा, कितनी बार फागिंग हुई या हैंडपंप रीबोर किये गए, इसकी हकीकत पता करना ज्यादा कठिन है। इसके उलट सड़क या नाली निर्माण आदि पर ज्यादा बजट होने से इसकी अंतिम अनुमति डीएम स्तर पर भी ली जाती है। ऐसे में गड़बड़झाले की गुंजाइश कम होती है। इससे इतर, सड़क व नाली निर्माण जैसे कामों की उपेक्षा की गई।
