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झोलाछाप के गलत ऑपरेशन से प्रसूता की मौत पर ऐतिहासिक फैसला: पहली बार 2 को उम्रकैद, पूर्व DM और CMO को भी नोटिस

Published: Sat, 03 Oct 2026 08:08 PM (IST)Updated: Sat, 03 Oct 2026 08:13 PM (IST)

अमरोहा में गलत ऑपरेशन से प्रसूता की मौत के मामले में दो झोलाछाप डॉक्टरों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई ...और पढ़ें

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HighLights

  1. नौ साल पहले रहरा में हुई थी प्रसूता की मौत

जागरण संवाददाता, अमरोहा। अपर जिला न्यायाधीश विशेष (एमपी-एमएलए) तृतीय की अदालत ने गलत आपरेशन से प्रसूता की मौत को गैरइरादातन हत्या का मामला मानते हुए अपंजीकृत अस्पताल के संचालक विल्सन व झोलाछाप मुस्तफा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

साथ ही अदालत ने जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल (अब विशेष सचिव) तथा तत्कालीन सीएमओ डाॅ. ज्ञान सिंह (सेवानिवृत्त) को अवैध अस्पतालों के संचालन पर रोक लगाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर नोटिस जारी किया है।

ऑपरेशन के दौरान प्रसूता की मौत के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने का जिले में पहला मामला है। अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी करने वाले सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी ने बताया कि आदमपुर क्षेत्र के गांव देहरी खादर निवासी विल्सन रहरा में युग मेडिकल सेंटर के नाम से अपंजीकृत अस्पताल का संचालन करता था।

गुरैठा गांव निवासी किसान नेम सिंह पत्नी रूबी को तीन अक्तूबर 2017 की रात लगभग 8 बजे प्रसव पीड़ा होने पर गांव के ही सत्यवीर, मुन्ने खां और धर्म सिंह के साथ पत्नी को लेकर युग मेडिकल सेंटर पहुंचा था।

जहां झोलाछाप विल्सन और उसकी पत्नी ने रूबी का सामान्य प्रसव होने की बात कहते हुए भर्ती कर लिया था। विल्सन ने रूबी को दवाएं देने के साथ ड्रिप चढ़ाई। कुछ देर बाद उसकी हालत बिगड़ी तो स्वजन ने इसकी जानकारी विल्सन को दी।

विल्सन ने ऑपरेशन करने की बात कहते हुए नया गांव सुल्तानपुर निवासी झोलाछाप मुस्तफा को मोबाइल काल कर बुला लिया था। रात करीब 12 बजे मुस्तफा व विल्सन ने स्वजन की सहमति के बगैर ही रूबी का ऑपरेशन कर दिया।

थोड़ी ही देर में रूबी की मौत हो गई थी। घटना के बाद स्वजन ने हंगामा किया था तो पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी तथा युग मेडिकल सेंटर को सील कर दिया था।

इस मामले में नेम सिंह ने विल्सन और मुस्तफा के विरुद्ध गैरइरादतन हत्या व मेडिकल एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया था, लेकिन फिलहाल वह जमानत थे।

अब मामले की सुनवाई अपर जिला न्यायधीश विशेष (एमपी-एमएलए) तृतीय की अदालत में चल रही थी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि शनिवार को अदालत ने झोलाछाप विल्सन और मुस्तफा को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

बताया कि साथ ही अदालत ने तत्कालीन डीएम नवनीत सिंह चहल व तत्कालीन सीएमओ डाॅ. ज्ञान सिंह पंवार को नोटिस जारी किया है। जिसमें अवैध अस्पतालों के संचालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने में लारपरवाही बरतने का तर्क दिया है।

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