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3 दिन में बने 1500 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, फिर भी सोता रहा प्रशासन! आखिर क्यों नहीं कराई गई सभी ग्राम पंचायतों की आइडी की जांच?

Published: Fri, 23 Oct 2026 02:37 PM (IST)

अमरोहा में तीन दिनों के भीतर लगभग 1500 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए, जिसमें पांच ग्राम पंचायतों की आईडी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले पर परदा डालने में जुटे जिम्मेदार

  2. प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद आगे नहीं बढ़ रही जांच

जागरण संवाददाता, अमरोहा। जिले की पांच ग्राम पंचायतों की आइडी हैक कर लगभग 1500 लोगों के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बना दिए गए। तीन दिन के भीतर यह फर्जीवाड़ा हुआ और जिम्मेदार सोते रहे। अन्य ग्राम पंचायतों की आइडी हैक करने के लिए भी ओटीपी भेजे गए। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने गंभीरता से नहीं लिया। किसने व क्यों यह जालसाजी की है? अभी यह बड़ा सवाल सभी के सामने है।

आखिर आरोपितों तक पुलिस कैसे पहुंचेगी यह भी तय नहीं हो सका है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच भी धीमी गति से आगे बढ़ रही है। आखिर प्रशासनिक अधिकारियों ने अन्य आइडी की जांच क्यों नहीं कराई? क्या फर्जीवाड़ा बड़ा है? क्या सारे मामले पर परदा डालने का प्रयास किया जा रहा है?

पांच अक्टूबर को जालसाजों ने मंडी धनौरा ब्लाक की ग्राम पंचायत मुसल्लेपुर, बाखरपुर, सैदपुर व मोहम्मदपुर पट्टी के सचिव राजीव कुमार की आइडी हैक कर 1100 से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बना दिए।

उसके बाद छह व सात अक्टूबर को जोया ब्लाक की ग्राम पंचायत तोफापुर के सचिव अमरजीत की आइडी हैक कर 498 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए। हालांकि तोफापुर प्रकरण तो 14 अक्टूबर को सामने आ गया था, लेकिन बुधवार को मंडी धनौरा की चारों ग्राम पंचायतों में हुआ फर्जीवाड़ा सामने आया है।

हैरत की बात तो यह है कि इस गंभीर प्रकरण को हल्के में लेने वाले जिम्मेदार अधिकारियों ने अन्य ग्राम पंचायतों की आइडी की जांच कराने की पहल नहीं की। आनन-फानन में उन्हें लाक कर निष्क्रिय कराने का काम शुरू कर दिया।

जबकि आज भी बड़ा सवाल यह है कि आखिर जालसाजों ने किस उद्देश्य से इतने बड़े पैमाने पर यह प्रमाण पत्र बनाए हैं। जाहिर है कि कहीं न कहीं इनका दुरुपयोग होना तय है।

मेल आइडी हैक कर लिया गया ओटीपी

स्वास्थ्य विभाग से जारी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाली इस आइडी का यूजर नेम व पासवर्ड केवल संबंधित कर्मचारी के पास ही होता है। यूजर आइडी जारी करने से पहले संबंधित ग्राम पंचायत/ग्राम सचिव की एक मेल आइडी भी बनाई जाती है।

शासन के सर्वर से स्वास्थ्य विभाग द्वारा उस मेल आइडी पर ही यूजर नेम व पासवर्ड भेजा जाता है। इसके साथ ही एक मोबाइल नंबर भी प्रयोग किया जाता है।

बताते हैं कि जब कोई भी यूजर नेम व पासवर्ड के द्वारा आइडी को खोला जाता है तो एक ओटीपी मेल आइडी व मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है।

उस ओटीपी से वेरिफिकेशन के बाद ही प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरु होती है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि मेल आइडी हैक कर यूजर नेम व पासवर्ड लिया है। उसके बाद उसी मेल पर आए ओटीपी का प्रयोग किया गया होगा।

बगैर संस्तुति के बनाए गए प्रमाण पत्र

देश में जन्म मृत्यु पंजीकरण अधिनियम वर्ष 1969 में बनाया गया था। जोकि 1 अक्टूबर 1970 को लागू हुआ था। उसके बाद देश में जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र पंजीकरण शुरू हुआ है।

अधिनियम लागू होने से पहले का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए संबंधित डीएम व एसडीएम की संस्तुति ली जाती है। जोकि पूरी जांच के बाद ही संस्तुति जारी की जाती है। जारी किए गए प्रमाण पत्रों में किसी सक्षम अधिकारी का संस्तुति पत्र भी नहीं लगा है।

 

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का दूसरा मामला भी संज्ञान में आया है। इसमें भी प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। शासन स्तर से इस मामले की जांच कराई जा रही है। साइबर सेल भी जांच कर रहा है। सभी आइडी निष्क्रिय कराई गई हैं।

- डाॅ. नितिन गौड़, डीएम।


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