बावनखेड़ी नरसंहार: 7 हत्याओं के दोषी सलीम को 18 साल बाद मिली पैरोल, बहन की शादी के लिए आया घर
बावनखेड़ी नरसंहार के दोषी सलीम को 18 साल बाद बहन की शादी में शामिल होने के लिए हाईकोर्ट से पैरोल ...और पढ़ें

हत्यारोपी सलीम
HighLights
हाईकोर्ट ने 21 से 27 अक्टूबर तक पैरोल पर रिहा किया
15 अप्रैल 2008 को प्रेमिका शबनम के साथ की थी सात लोगों की हत्या
जागरण संवाददाता, अमरोहा। हसनपुर के गांव बावनखेड़ी के चर्चित हत्याकांड में मौत की सजा पाने वाला सलीम 18 साल बाद जेल की सलाखों के बाहर निकला है।हाईकोर्ट ने उसे बहन की शादी में शामिल होने के लिए 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक की पैरोल पर रिहा कर दिया है। बुधवार देर रात सलीम को लेकर पुलिस घर पहुंच गई है। सुरक्षा में उसके साथ आए पुुलिस कर्मियों के साथ ही हसनपुर पुलिस के सिपाही भी तैनात रहेंगे।
दरअसल हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव वावनखेड़ी में 14/15 अप्रैल 2008 की रात को मास्टर शौकत अली, उनकी पत्नी हाशमी, बेटे अनीस व राशिद, पुत्रवधु अंजुम, पौत्र अर्श व शौकत अली की भांजी राबिया का गला काट कर हत्या कर दी गई थी।
अकेली जीवित बची शौकत अली की शिक्षामित्र बेटी शबनम के रोने की आवाज सुनकर घर के सामने स्थित आरा मशीन पर काम करने वाले लोगों रात में ही पुलिस को सूचना दी थी। सभी सात लोगों के गले काट कर हत्या की गई थी।
पहले इस मामले में अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक बाबूराम सागर को हटा कर निरीक्षक आरपी गुप्ता को हसनपुर का कोतवाल बनाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती भी इस नरसंहार को लेकर बावनखेड़ी पहुंची थीं।
पहले तो लोगों की सहानुभूति शबनम के साथ थी, लेकिन आरपी गुप्ता ने दो दिन के भीतर ही घटना का चौंकाने वाला राजफाश किया था। पुलिस ने घटना का राजफाश करते हुए शबनम व गांव के ही उसके प्रेमी सलीम को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
दोनों ने संपत्ति के लालच व शादी करने की मंशा से घटना को अंजाम दिया था। क्योंकि शौकत अली बेटी शबनम की शादी सलीम से कराने के पक्षधर नहीं थे। इस मामले में 15 जुलाई 2010 को सेशन कोर्ट ने शबनम और प्रेमी सलीम को फांसी की सजा सुनाई थी।
हालांकि दोनों ने पहले हाईकोर्ट तथा बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिका दायर कर फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की थी। परंतु दोनों को राहत नहीं मिली थी। इसके साथ ही राज्यपाल व राष्ट्रपति ने भी दोनों की दया याचिका खारिज कर दी थी।
फिलहाल शबनम बरेली जेल में तो सलीम प्रयागराज की नैनी जेल में बंद है। इससे पहले सलीम मथुरा की जेल में बंद था। 2008 में गिरफ्तार होने के बाद सलीम व शबनम को जमानत नहीं मिल सकी थी। चूंकि अब 25 अक्टूबर को सलीम की बहन आयशा की शादी है।
हसनपुर से बरात आनी है। लिहाजा सलीम ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर बहन की शादी में शामिल होने के लिए पैरोल मांगी थी। अधिवक्ता अरशद अंसारी ने बताया कि हाईकोर्ट ने बहन की शादी में शामिल होने के लिए सलीम को 21 से 27 अक्टूबर तक पैरोल को मंजूरी दी है।
बताया कि पैरोल मंजूर होने के बाद बुधवार देर रात पुलिस सलीम को लेकर बावनखेड़ी पहुंच गई है। 27 अक्टूबर की शाम तक सलीम को जेल वापस लौटना होगा। उसके बाद जेल अधीक्षक को 3 नवंबर को हाईकोर्ट में रिपोर्ट देनी होगी। उधर हसनपुर प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र सिरोहा ने बताया कि सलीम की सुरक्षा में पुलिस तैनात रहेगी।
