1927 में थानेदार के 5 रुपये के चंदे से शुरू हुई थी यह अनोखी रामलीला, 100 साल बाद भी थाना प्रभारी निभा रहे हैं परंपरा
अमरोहा के हसनपुर स्थित आदमपुर गांव में 100 साल पुरानी रामलीला की अनोखी परंपरा है, जिसे 1927 में तत्कालीन थानेदार ...और पढ़ें

बुखारीपुर में धनुष यज्ञ की लीला का मंचन करते कलाकार। जागरण
राशिद चौधरी, हसनपुर (अमरोहा)। तहसील क्षेत्र के गांव आदमपुर में रामलीला की सौ साल पुरानी अनोखी परंपरा चली आ रही है। यहां थानाध्यक्ष ही रामलीला का उद्घाटन करते हैं। वर्ष 1924 में थाना स्थापित हुआ था। उस समय पूरे क्षेत्र में कहीं पर भी रामलीला नहीं होती थी।
वर्ष 1927 में पहले थानेदार प्रह्लाद सिंह ने क्षेत्र की जनता की बैठक करके अपने वेतन से पांच रुपये का चंदा देकर रामलीला शुरू कराई थी। रामलीला देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते थे।

आदमपुर में प्राचीन त्रिमूर्ति धाम पातालेश्वर शिव मंदिर थाने के बराबर में स्थित है। मंदिर के पास काफी ऊंचा व लंबा चौड़ा रामलीला मैदान है। प्रत्येक वर्ष श्राद पक्ष की अमावस्या से एकादशी तक यहां भव्य रामलीला का मंचन होता है।
लेकिन, यहां के लोगों और रामलीला कमेटी ने सौ वर्ष पुरानी थानाध्यक्ष से ही रामलीला का उद्घाटन कराने की परंपरा को अभी तक कायम रखा है। खास बात तो यह है कि सौ साल की अवधि में कई थानाध्यक्ष मुस्लिम भी इस प्राचीन परंपरा को निभाकर रामलीला में सहयोग करते आ रहे हैं।
50 वर्ष तक दिन में हुई रामलीला
वर्ष 1927 से 1977 तक यहां दिन में रामलीला हुआ करती थी। उसकी वजह यह होती थी कि रात में प्रकाश की व्यवस्था नहीं हो पाती थी। दूर-दूर से महिलाएं और पुरूष रामलीला देखने आते थे तो सुरक्षा कारणों से भी दिन में ही रामलीला का आयोजन होता था। 1977 के बाद दौर बदला तो कमेटी के लोग केरोसिन का प्रबंध करके रात में रामलीला कराने लगे।
खाकी और आस्था ने सजाया रामलीला मंच
आदमपुर में रामलीला का मंच खाकी और आस्था ने ऐसा सजाया कि अब रामलीला का स्वरूप काफी बदल गया है। थानाध्यक्ष ने पांच रुपये का चंदा देकर चंदा देने और दूसरों से लेने की प्रेरणा दी।
पहले गांव के ही कलाकार रामलीला करते थे। धीरे-धीरे कमेटी चंदा करके बाहर से कलाकार बुलाने लगी। इस बार चंदौसी के रामलीला कलाकर बुक किए गए हैं। रामलीला से पहले मंदिर व रामलीला मैदान को दुल्हन की तरह से सजाया जाता है।
यह बोले रामलीला कमेटी के लोग
आदमपुर में थानाध्यक्ष ने रामलीला शुरू कराई थी इसलिए थानाध्यक्ष से ही रामलीला का शुभारंभ कराया जाता है। लोग सौ वर्ष पुरानी पंरपरा पर कायम है। - सतीश अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य/रामलीला कमेटी संयोजक।
आदमपुर की रामलीला में शुरू से ही पुलिस प्रशासन का पूर्ण सहयोग रहा है। जिस जमाने में थाना प्रभारी ने पांच रुपये देकर रामलीला कराई थी तब पांच रुपये बड़ी रकम थे। - राजेंद्र सिंह, अध्यक्ष रामलीला कमेटी
आदमपुर में जिस दौर में रामलीला शुरू हुई थी तब क्षेत्र के पचास से अधिक गांवों के लोग रामलीला देखने आते थे। उसके बाद आसपास के अन्य गांवों में भी लोग रामलीला करने लगे। - राजेश गोयल, कोषाध्यक्ष।
आदमपुर की रामलीला का सौ वर्ष पुराना गौरवमयी इतिहास रहा है। यहां थानाध्यक्ष ने शुरू की रामलीला की परंपरा को वर्तमान थानाध्यक्ष भी बखूबी निभाते रहे हैं। - कृपाल सैनी, उपाध्यक्ष।
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