वकील, गवाह से लेकर मेहर की रकम तक... अमरोहा में 155 साल पुराने रजिस्टर में दर्ज हैं पूर्वजों के निकाह की परतें
अमरोहा के मुहल्ला मुल्लाना निवासी स्वर्गीय काजी महबूब अहमद के परिवार ने 1871 से 1983 तक के निकाह के 155 ...और पढ़ें

पूर्वजों के निकाह का रिकार्ड लोगों को दिखाते फहीम शाहनवाज । जागरण
HighLights
पिता की की मौत के बाद महबूब अहमद ने संभाला था काजी का कार्य
जागरण संवाददाता, अमरोहा। नगर के मुहल्ला मुल्लाना निवासी स्वार्गीय काजी महबूब अहमद कई पीढ़ियों से खानदानी काजी रहे थे, जो लोगों के निकाह पढ़ाते थे। पिता इब्ने अहमद की मौत के बाद महबूब अहमद ने काजी का कार्य संभाला था। लेकिन 1991 में उनकी मृत्यु के बाद कोई भी काजी नहीं है।
इसमें खास बात यह है कि 1871 से लेकर 1983 तक का निकाह पढ़ाने का रिकार्ड आज भी उनके भांजे सभासद फहीम शाहनवाज के पास सुरक्षित रखा हुआ है।
आज भी अगर किसी भी व्यक्ति को अपने पूर्वजों के निकाह की तारीख देखनी होती है तो वह उनके भांजे के घर जाते हैं। जिससे 155 साल पूराना रिकार्ड पूर्वजों के निकाह का गवाह बना हुआ है।
शहर के मुहल्ला मुल्लाना निवासी स्वर्गीय काजी इब्ने अहमद ने अपने पिता काजी इब्ने अब्बासी की मौत के बाद काजी का कार्य शुरू किया था। इब्ने अहमद की मौत के बाद बड़े बेटे महबूब अहमद ने खानदानी काजी का कार्य संभाला और लोगों ने निकाह कराने शुरू किए थे।
इसमें जिले में दूर-दूर तक इकलौत काजी थे जो निकाह कराते थे। याददाश्त के लिए 1871 से ही इंडेक्स रजिस्टर तैयार तीन तीन जिल्दों में निकाह को बारीकी से दर्ज करते थे। जिसमें हर इंडेक्स रजिस्ट्रर में 1871 से लेकर 1983 तक की शादी का रिकार्ड दर्ज है।
उनके कोई औलाद नहीं हुई थी। लिहाजा उन्होंने अपने भांजे फहीम शाहनवाज को अपने घर रख लिया था। वह जिलेभर में दूर-दूर तक काजी के नाम से विख्यात थे। लेकिन 1991 में उनकी मौत हो गई थी।
जिसके कारण खानदानी काजी का कार्य बंद हो गया था, लेकिन पूर्वजों के निकाह का 155 साल पुराना रिकार्ड आज भी सभासद फहीम शानवाज के पास सुरक्षित रखा है।
इसमें किसी भी व्यक्ति को अपने पूर्वजों के निकाह की तारीख देखनी होती है तो वह उनके घर जाते हैं। जिसमें इंडेक्स रजिस्ट्रर में नाम व वर्ष देखने के बाद जिल्द खोलकर देखते है।
इसमें जिल्द में पूरा विवरण लिखा रहता है कि किस के साथ निकाह हुआ, कौन वकील था, कितने गवाह थे और कितनी मेहर दी गई थी। फिलहाल 155 साल पूराना रिकार्ड आज भी पूर्वजों के निकाह का गवाह बना हुआ है।
