किसान करेंगे दोगुनी कमाई! अलसी के डंठल से बनेगा लिनेन कपड़ा; यूपी की वैशाली सिंह की रिसर्च ने जगाई उम्मीद
अमेठी की वैशाली सिंह ने अपने पीएचडी शोध में अलसी के बेकार डंठलों से लिनेन कपड़ा बनाने की विधि विकसित की है।

पहली तस्वीर AI जेनेरेटेड है और वैशाली सिंह
HighLights
अलसी के बेकार डंठलों से लिनेन कपड़ा बनाने का अनूठा शोध।
किसानों को दोहरी आय और ग्रामीण रोजगार के अवसर मिलेंगे।
पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक रेशों को बढ़ावा, प्रदूषण में कमी आएगी।
संवाद सूत्र, अमेठी। कृषि विज्ञान और वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में दादरा गांव की बेटी वैशाली सिंह ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने पीएचडी शोध के जरिए यह साबित कर दिया है कि अलसी की कटाई के बाद खेतों में बेकार समझकर जलाए जाने वाले डंठल अब किसानों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं।
उनके इस उत्कृष्ट शोध के आधार पर उन्हें चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर द्वारा पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया है।
परिधान एवं वस्त्र विज्ञान विभाग में शोध निर्देशिका डॉ. ऋतु पांडेय के मार्गदर्शन में वैशाली ने भारतीय अलसी (टीसी) रेशे का कम उपयोग हुआ। वस्त्र उद्योग में उपयोग की संभावनाओं का अन्वेषण' विषय पर गहन शोध कार्य पूरा किया। शोध में यह तथ्य सामने आया कि पारंपरिक रूप से किसान अलसी के बीज और तेल का उपयोग तो करते हैं, लेकिन फसल कटने के बाद भारी मात्रा में बचे डंठलों को या तो फेंक देते हैं अथवा जला देते हैं, जिससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचता है।
किसानों को दोहरी आमदनी का बड़ा जरिया मिलेगा
वैशाली ने इन्हीं अनुपयोगी डंठलों को सड़ाकर और वैज्ञानिक विधि से उनसे रेशा निकालकर,उसमें कपास मिलाकर मजबूत व हवादार लिनेन कपड़ा तैयार करने की संभावनाओं का सफल अध्ययन किया है। उनका मानना है कि यदि शासन-प्रशासन और वस्त्र उद्योग मिलकर किसानों से अलसी के डंठल की सीधी खरीद की व्यवस्था करें, तो किसानों को दोहरी आमदनी का बड़ा जरिया मिल सकेगा।
इससे ग्रामीण अंचल में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक रेशों को भी बढ़ावा मिलेगा। अपनी सफलता का श्रेय वैशाली ने अपनी माता शशि सिंह, पिता संतोष कुमार सिंह और अपने छोटे भाई को दिया है।
वैशाली ने वर्ष 2021 में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से बीएससी और वर्ष 2023 में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से एमएससी की डिग्री प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने परिधान एवं वस्त्र विज्ञान विभाग में यह प्रतिष्ठित उपलब्धि हासिल की है।
