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अमेठी के शिवरतनगंज की 216 साल पुरानी रामलीला की परंपरा, कभी 15 दिन चलती थी; अब 5 दिनों में सिमटी

Published: Thu, 15 Oct 2026 12:57 PM (GMT+05:30)

अमेठी के शिवरतनगंज में 216 साल पुरानी रामलीला और दशहरा की परंपरा इस साल 15 अक्टूबर से शुरू होगी, जिसकी शुरुआत तालुकेदार शिवरतन सिंह ने 1810 में की थी।

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HighLights

  1. शिवरतनगंज में 216 साल पुरानी रामलीला परंपरा।

  2. तालुकेदार शिवरतन सिंह ने 1810 में की थी शुरुआत।

  3. स्थानीय कलाकार करेंगे पांच दिवसीय रामलीला का मंचन।

अर्जुन सिंह भदौरिया, तिलोई(अमेठी)। पन्हौना रियासत के तालुकेदार शिवरतन सिंह ने शिवरतनगंज में सन 1810 में पहली बार दशहरे का आयोजन कराया था। दशहरा आयोजन से पूर्व 15 दिनों की श्रीराम लीला की परंपरा की शुरुआत की गई थी।

दो सदी पूर्व शुरू हुई रामलीला की परंपरा आज भी कायम है। समय के साथ इस परंपरा में बदलाव हुए हैं। शुरुआत में यह रामलीला 15 दिन की होती थी। बाद में दस दिन और अब वह घटकर पांच दिनों की रह गई है।

रामलीला और दशहरा मेला क्षेत्र का सबसे पुराना आयोजन है। जेहटा उसरहा के प्रधान रहे वयोवृद्ध श्रीकृष्ण मिश्र ने बताया कि पन्हौना रियासत के तालुकेदार की रंग मंच की दिलचस्पी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रामलीला कराने के लिए तालुकेदार एक महीने पूर्व ही टेंट में डेरा डालकर रामलीला में पात्र अदा करने वाले कलाकारों के साथ रह कर रिहर्सल कराते थे।

15 दिन के रामलीला की शुरुआत पितृ पक्ष की नौमी तिथि के दिन से होती थी। दशहरे के दूसरे दिन राजगद्दी की लीला पर समापन होता था। तालुकेदार शिवरतन सिंह स्वयं पात्र अदा करते थे।

उनके वृद्ध होने पर पुत्र कन्हैया बख्श सिंह ने पिता के पग चिह्नों पर चलते हुए कालांतर में पिता द्वारा डाली गई परंपरा को आगे बढ़ाया। यही नहीं तालुकेदार ने अपने गांव से दर्जन भर से अधिक बनिया जाति के परिवारों को शिवरतनगंज में लाकर बसाया था। कालांतर में तालुकेदार के नाम पर ही इस स्थान का नाम शिवरतनगंज हो गया।

घटता चला गया रामलीला मंचन का समय

समयाभाव और लोगों की घटती रुचि के चलते अब शिवरतनगंज में पांच दिन में ही राम लीला सीमित हो गई है। पहले स्थानीय लोग मिलजुल कर रामलीला का मंचन करते थे। वर्तमान में कमेटी बाहर से रामलीला करने वाले कलाकारों की टोली बनाने लगी है। रामलीला में कभी जामवंत का किरदार निभाने वाले वयोवृद्ध बाबूलाल जायसवाल ने बताया कि अब नए लड़कों में रामलीला करने की रुचि नहीं है। इसलिए अब धीरे धीरे लोगों का जुड़ाव घट रहा है। अवस्थी परिवार अभी इस परंपरा को निभा रहा है।

15 अक्टूबर से होगी रामलीला, स्थानीय कलाकार करेंगे मंचन

पांच दिवसीय रामलीला का मंचन स्थानीय कलाकार करेंगे। आयोजक मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष डा. अशोक अवस्थी ने बताया कि बीते वर्ष बाहर के कलाकार रामलीला आयोजन के लिए बुलाए गए थे। डा. अशोक अवस्थी ने बताया कि रामलीला आयोजन के लिए पात्रों का रिहर्सल का कार्य जारी है। आयोजन में रुचि रखने वाले पुराने लोग भी सहयोग कर रहे हैं। रामलीला मंचन में स्थानीय कलाकारों को तरजीह दी जा रही है।

तालुकदार के लिखे संवाद पर होती है रामलीला

तालुकेदार द्वारा लिखे संवाद और राधेश्याम कृत रामायण पर आधारित रहता है। रामलीला का मंचन समय के अनुसार भजन और गीत में बदलाव होता है। उन्हीं के लिखे संवाद प्रत्येक पात्र रामलीला में बोलता है, जो बहुत सुंदर लगता है। स्थानीय कलाकारों से रामलीला प्रथा पुनः शुरू होने से स्थानीय लोगों में खुशी है।

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