पिता 'रावण' और बेटा 'हनुमान'! उत्तर प्रदेश के सुल्तानगढ़ में 140 साल पुरानी अद्भुत रामलीला
अंबेडकरनगर के सुल्तानगढ़ गांव में 140 साल से चली आ रही रामलीला में पिता रावण और बेटा हनुमान का किरदार ...और पढ़ें

सुल्तानगढ़ में 140 साल पुरानी अद्भुत रामलीला।
HighLights
सुल्तानगढ़ में 140 साल पुरानी रामलीला की परंपरा।
पिता त्रिभुवन रावण, बेटा मुकेश हनुमान का किरदार निभाते हैं।
लंका दहन का दृश्य देखने दूर-दूर से आते हैं लोग।
उपेंद्र मौर्य/मनोज सिंह, अंबेडकरनगर। ढोलक की थाप और हारमोनियम की धुन के बीच कहां है राम” की गूंज, सुल्तानगढ़ गांव में शाम को यह संदेश सुनाई देता है। खेतों से लौटे किसान, चाय की दुकान पर बैठे बुजुर्ग और खेलते बच्चे रामलीला मैदान की ओर दौड़ पड़ते हैं।
इस गांव में 140 साल से चली आ रही यह रामलीला महज मंचन नहीं, जीवित परंपरा है। यहां कलाकार किरदारों को जीते हैं। गांव में त्रिभुवन यादव को “रावण चाचा” और मुकेश यादव को “हनुमान भैया” के नाम से पुकारा जाता है।
60 वर्षीय त्रिभुवन यादव 40 साल से रावण की भूमिका निभा रहे हैं। 10 सिर वाला मुकुट पहनकर मंच पर आते ही उनका रौब दर्शकों को बांध लेता है। उन्हें चुनौती देने मंच पर आते हैं उनके बेटे मुकेश यादव, जो हनुमान बनकर पूंछ में आग लगाते और लंका दहन करते हैं। पिता रावण बनकर आग लगाने की धमकी देते हैं और बेटा हनुमान के रूप में लंका जला देता है। यह दृश्य देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।
मुकेश कभी परशुराम बनकर क्रोध दिखाते हैं, तो कभी दशरथ की भूमिका में पुत्र वियोग से भावुक कर देते हैं। वह कहते हैं कि लंका दहन के समय वे पिता-पुत्र नहीं, बल्कि रावण और रामदूत होते हैं। पर्दे के पीछे पिता “वाह बेटा” कहकर शाबाशी देते हैं। त्रिभुवन कहते हैं, “खेती से घर चलता है, रामलीला से आत्मा। मंच पर हम दुश्मन हैं, घर पर पिता-पुत्र। गांव वाले रावण नाम से पुकारते हैं, इसी में गर्व है।”
खर-दूषण की भूमिका निभाने वाले चंदन और सतगुरु कसौधन असल जिंदगी में भी सगे भाई हैं। उनका कहना है कि खून का रिश्ता होने से मंच पर उनकी जोड़ी और सटीक लगती है।
रामलीला समिति के अध्यक्ष और प्रधान राकेश जायसवाल ने बताया कि इस बार रामलीला 28 अक्टूबर से शुरू होगी। इसे किसने शुरू किया, यह कोई नहीं जानता, लेकिन तीसरी पीढ़ी इस 140 साल पुरानी विरासत को आगे बढ़ा रही है।
