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कभी घर में खाना नहीं था, YouTube से सिलाई सीख अमेठी की मीना ने बदली किस्मत; दूसरों को भी दे रहीं रोजगार 

Published: Tue, 13 Oct 2026 12:50 PM (IST)

आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई छोड़ने वाली मीना ने सिलाई को अपना जरिया बनाया और आज वह आत्मनिर्भर हैं।

YouTube से सिलाई सीख अमेठी की मीना ने बदली किस्मत।

YouTube से सिलाई सीख अमेठी की मीना ने बदली किस्मत।

HighLights

  1. मीना ने आर्थिक तंगी के बावजूद सिलाई से बदली जिंदगी।

  2. अमेठी में 100 से अधिक युवतियों को सिलाई सिखाई।

  3. युवतियों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बना रही हैं।

अर्जुन सिंह भदौरिया, अमेठी। कभी परिवार की आर्थिक तंगी के चलते हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी, तो कभी दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल था। लेकिन मीना ने हालात के आगे घुटने नहीं टेके।

पति के साथ मजदूरी की, पाई-पाई जोड़कर सिलाई मशीन खरीदी और अपने हुनर को जिंदगी बदलने का जरिया बना लिया। आज वही मीना न केवल अपने परिवार का सहारा बनी हैं, बल्कि 100 से अधिक युवतियों को सिलाई सिखाकर उनके सपनों को भी नई उड़ान दे रही हैं।

खारा ग्राम पंचायत के पड़रावां निवासी मीना का जीवन संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी है। कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। शादी के बाद भी मुश्किलें कम नहीं हुईं।

परिवार की हालत सुधारने के लिए उन्होंने पति रमेश के साथ मजदूरी की और अपनी कमाई से सिलाई मशीन खरीदी। सिलाई का थोड़ा ज्ञान था, जिसे निखारने के लिए उन्होंने यू-ट्यूब का सहारा लिया। इसके बाद घर के बरामदे में बच्चियों के सलवार-सूट और ब्लाउज सिलने शुरू किए।

छोटे से प्रयास ने बदली जिंदगी

गांव में सिलाई का पर्याप्त काम नहीं मिला तो मीना ने कोरोना काल के बाद अहोरवा भवानी में किराये पर दुकान लेकर अपना काम शुरू किया। मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे उनकी पहचान बढ़ने लगी।

सिलाई के साथ उन्होंने युवतियों को प्रशिक्षण देना भी शुरू कर दिया। आज उनकी दुकान पर 25 से अधिक युवतियां हुनर सीख रही हैं। अब तक शिवानी, श्वेता, अस्मिता, सोनाली, सलोनी, लक्ष्मी, अंजली, मोहिनी, आरती और खुशनुमा सहित 100 से अधिक युवतियां उनसे प्रशिक्षण ले चुकी हैं।

दूसरों के संघर्ष को बना रहीं आसान

मीना की कोशिश केवल सिलाई सिखाने तक सीमित नहीं है। वह आर्थिक रूप से कमजोर युवतियों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार की राह दिखाती हैं, ताकि पूंजी की कमी उनके सपनों में बाधा न बने।

उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि जिन परिवारों की बेटियां कभी आर्थिक तंगी से जूझती थीं, वे आज अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

मीना बताती हैं कि करीब पांच साल पहले उनके घर में खाने-पीने की चीजों के लिए भी परेशानी होती थी। आज सिलाई के हुनर ने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार दी है। उनका मानना है कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता, जरूरत है तो बस मेहनत, लगन और आगे बढ़ने के हौसले की।

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