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अमेठी की शालनी सिंह बनीं मिसाल, मिट्टी के बर्तनों से लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी; कई महिलाओं को दिया रोजगार

Published: Tue, 11 Aug 2026 03:29 PM (IST)

अमेठी की शालनी सिंह ने अपनी आर्थिक तंगी दूर करने के लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मिट्टी के बर्तन ...और पढ़ें

मिट्टी के बर्तनों ने दिया रोजगार।

मिट्टी के बर्तनों ने दिया रोजगार।

HighLights

  1. शालनी सिंह ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर व्यवसाय शुरू किया।

  2. मिट्टी के बर्तन बनाकर खुद आत्मनिर्भर बनीं और दूसरों को रोजगार दिया।

  3. उनके प्रयास से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी, बच्चे अच्छी शिक्षा पा रहे।

आशुतोष तिवारी, रामगंज (अमेठी)। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। किसी तरह से दो जून की रोटी का ही जुगाड़ हो पा रहा था। पैसे के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। गांव में स्वयं सहायता समूह के गठन को लेकर हुई बैठक में खरगपुर की शालनी सिंह ने भी भाग लिया। कम लागत में अधिक आमदनी के उद्देश्य से इन्होंने मिट्टी के बर्तन बनाना शुरू किया। खुद आत्मनिर्भर बनीं, अब पांच अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है।

शालनी सिंह वर्ष 2023-24 में शारदा स्वयं सहायता समूह महामाई ग्राम संगठन एयर उमंग संकुल संघ से जुड़ी। उन्होंने अपनी जमीन से मिट्टी खोदाई कराकर किसी तरह से 25 हजार रुपये का जुगाड़ कर मिट्टी के कुल्हड़, प्लेट, कोसा बनाने का कार्य प्रारंभ किया तो गांव की महिलाओं में एक नई ऊर्जा का विकास हुआ। शालिनी ने समूह की महिलाओं को जोड़कर अपने यहां 8000 रुपये मासिक मेहनताना देकर दो लोगों को भी कम पर लगाया।

धीरे धीरे काम बढ़ता गया तो अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा। समूह से जुड़ने के बाद परिवार के लोग भी अच्छे से बात करने लगे। बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ाई करने लगे। परिवार के लोग जो ताना मारते थे वह भी अब बंद कर दिए हैं। वह बताती हैं कि आस पास के बाजारों में संपर्क कर ई-रिक्शा से कुल्हड की आपूर्ति शुरू की। पड़ोसी सुलतानपुर और प्रतापगढ़ में भी आपूर्ति की जा रही है।


शालिनी सिंह के द्वारा शारदा स्वयं सहायता समूह से मिट्टी के बर्तन और कुल्हड़ बनाने का कार्य किया जा रहा है। जिसको देख कर अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं। वह अपनी मेहनत के दम से अपना नया रोजगार स्थापित किया है, जो और भी महिलाओं के नजीर पेश करती है। इस प्रकार के छोटे छोटे कार्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा भी तय करते है।- प्रवीना शुक्ला, उपायुक्त स्वत: रोजगार

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