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अमेठी में ई-कचरा एकत्र करने के लिए बनेंगे केंद्र, बच्चे सीखेंगे वेस्ट मैनेजमेंट

Published: Wed, 30 Sep 2026 03:34 PM (IST)

अमेठी के बेसिक और माध्यमिक स्कूलों को अब ई-कचरा संग्रहण केंद्र बनाया जाएगा, जिससे छात्र अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा कर सकेंगे।

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HighLights

  1. स्कूलों में ई-कचरा संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

  2. छात्र अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा कर वेस्ट मैनेजमेंट सीखेंगे।

  3. पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरूकता अभियान दो चरणों में चलेगा।

जागरण संवाददाता, अमेठी। बेसिक और माध्यमिक स्कूलों को अब ई-कचरा संग्रहण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। शिक्षा विभाग की इस नई पहल का उद्देश्य छात्रों को इलेक्ट्रानिक कचरे की पहचान कराना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

इस व्यवस्था के तहत छात्र अपने घरों में पड़े अनुपयोगी व खराब इलेक्ट्रानिक उपकरणों को अभिभावकों की सहमति से स्कूल में बने संग्रह केंद्र पर जमा कर सकेंगे। इससे उन्हें ई-कचरा वेस्ट मैनेजमेंट सिखाया जाएगा।

बेसिक स्कूलों में अब ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण की दिशा में पहल की जाएगी। इसके तहत स्कूल परिसरों में ई-कचरा संग्रहण केंद्र बनाए जाएंगे।

इन केंद्रों पर विद्यार्थी और विद्यालय कर्मचारी खराब मोबाइल फोन, चार्जर, केबल, कैलकुलेटर, की-बोर्ड समेत अन्य अनुपयोगी इलेक्ट्रानिक सामान जमा कर सकेंगे। विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर अभियान के तहत विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। अभियान दो चरणों में संचालित होगा।

इसके माध्यम से विद्यार्थियों को ई-कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और इसके सुरक्षित निस्तारण के तरीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी। स्कूलों में अभियान के माध्यम से बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर विशेष जोर रहेगा।

साथ ही स्वच्छ विद्यालय परिसर बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। विद्यालय स्तर पर अनुपयोगी इलेक्ट्रानिक उपकरणों एवं अन्य ई-कचरे को एकत्र किया जाएगा। इसके बाद एकत्र ई-कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे निस्तारण के लिए भेजा जाएगा। अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को ई-कचरे के दुष्प्रभावों से अवगत कराने के साथ उन्हें जिम्मेदार पर्यावरण प्रहरी के रूप में तैयार करना है।

आयोजित कराई जाएगी प्रतियोगिता

विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में अनावश्यक वस्तुओं का उपयोग कम करने, वस्तुओं का पुनः उपयोग करने तथा कचरे को अलग-अलग करके पुर्नचक्रण के लिए देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत निबंध, स्लोगन, पेंटिंग,भाषण, प्रश्नोत्तरी और माडल निर्माण जैसी विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में रचनात्मकता, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और स्वच्छता की भावना विकसित होगी।

दो चरणों में चलेगा अभियान

ई-कचरा प्रबंधन के लिए दो चरणों में अभियान चलाया जाएगा। पहला चरण 30 सितंबर तक व दूसरा चरण दो अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें चार रंग के कूड़ेदान रखे जाएंगे और उसके अनुसार ही कचरा एकत्रित किया जाएगा। स्वच्छता के साथ ईको फ्रेंडली वातावरण बनाने पर जोर रहेगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा का आदेश आने के बाद विभाग ने कवायद तेज कर दी है।

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चार रंग के होंगे डिब्बे

स्कूलों में कचरे को चार श्रेणियों में अलग करने के लिए चार रंग के डिब्बे रखे जाएंगे। हरे डिब्बे में गीला, नीले में सूखा, लाल में स्वच्छता अपशिष्ट और काले डिब्बे में विशेष देखभाल वाले कचरे को रखा जाएगा। गीले कचरे में भोजन और फल-सब्जियों के छिलके, जबकि सूखे कचरे में कागज, प्लास्टिक, कांच, रबर और लकड़ी शामिल होंगे। स्कूलों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक को अभियान चलेगा

विद्यार्थियों को वस्तुओं का कम उपयोग करने, उनका पुनः उपयोग करने और कचरे को पुर्नचक्रण के लिए अलग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। कार्यक्रम में निबंध, स्लोगन, पेंटिंग, भाषण, प्रश्नोत्तरी और माडल निर्माण प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाएगी।

राजेश द्विवेदी, डीआइओएस