अमेठी के 16 पीएम श्री स्कूलों में बनेंगे 'लर्निंग कॉर्नर', खेल-खेल में पढ़ाई करेंगे बच्चे
अमेठी के 16 पीएम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वित्तीय वर्ष 2026-27 तक लर्निंग कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। इन कॉर्नरों ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
16 पीएम श्री स्कूलों में लर्निंग कॉर्नर विकसित होंगे।
3-6 वर्ष के बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा।
मानसिक, शारीरिक, सामाजिक विकास पर रहेगा जोर।
जागरण संवाददाता, अमेठी। 16 पीएम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान लर्निंग कार्नर विकसित किए जाएंगे। विद्यालय परिसर स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिका में तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देने के लिए यह पहल की जा रही है। इसके तहत बच्चों की आयु और सीखने की क्षमता के अनुरूप शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी बुनियादी दक्षताओं को मजबूत किया जा सके।
विभागीय निर्देशों के अनुसार प्रत्येक संबंधित विद्यालय में चार प्रकार के लर्निंग कार्नर बनाए जाएंगे। इनमें रीडिंग कार्नर, ब्लाक कार्नर, आर्ट कार्नर और परफार्मेंस कार्नर शामिल हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों के मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर ध्यान दिया जाएगा। रीडिंग कार्नर में चित्रों वाली कहानी की पुस्तकें, हिंदी वर्णमाला की मैट, चित्र एवं संख्या चार्ट समेत अन्य पठन सामग्री रखी जाएगी।
इससे बच्चों में किताबों के प्रति रुचि बढ़ेगी और भाषा व शब्दावली की समझ विकसित होगी। वहीं, ब्लाक कार्नर में गतिविधि आधारित सामग्री के माध्यम से बच्चे आकार, रंग और वस्तुओं की पहचान करना सीखेंगे। इससे उनकी सोचने-समझने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। - चित्रकारी और गतिविधियों से निखरेगी प्रतिभा
आर्ट कार्नर में बच्चों के लिए सुरक्षित रंग, क्रेयॉन, बाल-सुरक्षित गोंद, कागज और स्पंज पेंटिंग किट जैसी सामग्री उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इनके माध्यम से बच्चे चित्रकारी और रंग भरने जैसी गतिविधियों में भाग लेकर अपनी कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति क्षमता विकसित करेंगे। परफॉर्मेंस कॉर्नर में गतिविधियों के जरिए बच्चों को अपनी बात रखने, दूसरों के साथ सहयोग करने और आत्मविश्वास बढ़ाने के अवसर मिलेंगे।- सुरक्षा और सुविधा का भी रखा जाएगा ध्यान
लर्निंग कॉर्नर में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। पुस्तकों के लिए खुले रैक, कला सामग्री रखने की व्यवस्था, प्लास्टिक की टोकरियां और हाथ साफ करने के लिए तौलिए जैसी उपयोगी वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सामग्री का चयन बच्चों की उम्र और जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय कहानी, चित्र, रंग और खेल आधारित गतिविधियों से सीखने का अवसर देना है। इससे विद्यालय के प्रति उनका आकर्षण बढ़ने के साथ भाषा, गणना, रचनात्मकता, सामाजिक व्यवहार और आत्मविश्वास जैसे बुनियादी कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी।
गोविंद नारायण शुक्ल, जिला समन्वयक-गुणवत्ता एवं प्रशिक्षण
