विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

3.6 करोड़ से मालती काे मिलेगा जीवनदान, नमामि गंगे योजना के तहत नदी के पुनरुद्धार का प्रस्ताव तैयार

Published: Sun, 16 Aug 2026 04:54 PM (GMT+05:30)

नमामि गंगे योजना के तहत मालती नदी के पुनरुद्धार और कायाकल्प के लिए 3.6 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

News Article Hero Image

HighLights

  1. नमामि गंगे योजना के तहत मालती नदी का कायाकल्प।

  2. 3.6 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया।

  3. 'एक जनपद एक नदी' योजना में मालती नदी का चयन।

देवेंद्र सिंह परिहार, अमेठी। एक जनपद एक नदी के तहत मालती नदी का पुनरोद्धार व कायाकल्प कराया जाएगा। जिसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। सिंचाई विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है।

अधिशासी अभियंता शारदा सहायक खंड-41 की ओर से अधिकारियों ने नदी का मौका मुआयना कर नमामि गंगे योजना के तहत 3.6 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। मंजूरी मिलते ही कार्य प्रारंभ करा दिया जाएगा।

मालती नदी जिले की एक प्रमुख जलधारा है। यह नदी क्षेत्र के प्राकृतिक जल निकासी तंत्र का प्रमुख हिस्सा है। मूल रूप से संग्रामपुर के बड़गांव के खरहा से निकलकर प्रतापगढ़ के ग्राम जलालपुर ब्लाक मगरौरा के चमरौरा में मिल जाती है, जो कि सई नदी की सहायक नदी है।

ऐतिहासिक रूप से इस नदी के किनारे बसे गांव अपनी सिंचाई और पशुपालन के लिए निर्भर है। मालती नदी की कुल लंबाई 39.393 किमी है, जिसमे से 31.693 किमी अमेठी व 7.700 किमी प्रतापगढ़ का हिस्सा है।

मालती नदी का पौराणिक महत्व

मालती नदी का पौराणिक और धार्मिक इतिहास बहुत पुराना है। मान्यता है कि वनवास जाते समय भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता ने संग्रामपुर स्थित नदी के तट पर विश्राम और स्नान किया था, जो 'रामघाट' (ठेंगहा) कहलाता है।

वर्तमान स्थिति और समस्याएं

लोगों की मानें तो संरक्षण के अभाव और अवैध मिट्टी खनन के कारण यह ऐतिहासिक नदी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।

मालती नदी के किनारे बसे गांव

सोनारी कला, घोरहा, भादर, टीकरमाफी, तिवारीपुर, नोनरा, करनाईपुर, कोलवा, सहजीपुर, नरवा, शुकुलपुर, अमिलहना, पतापुर, टिकरिया, भौसिंहपुर, सोनारी, भैरवपुर, गोरखापुर, विशेषरगंज, हिम्मतगढ़, डेहरा, ककवा, महराजपुर सहित अन्य गांव शामिल है।

शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही मालती नदी का पुनरोद्धार व कायाकल्प कराया जाएगा। मालती नदी का कायाकल्प होने से आमजन को काफी फायदा मिलेगा। साथ ही भूगर्भ जल स्तर भी दुरुस्त होगा।

-पूजा साहू, सीडीओ

यह भी पढ़ें- एक जनपद एक नदी योजना; इटावा में 1 जून से शुरू होगा 53 किमी लंबी सिरसा नदी का पुनरुद्धार कार्य

यह भी पढ़ें- नदी है कि...भगवान के नाम के गांवों का किनारा, देवी-देवताओं के नाम पर हैं बेलन नदी के किनारे बसे दर्जनों गांव व मजरे