अंबेडकरनगर : कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में शहर से ज्यादा गांव में सतर्कता नजर आती है। खामोश गांव की गलियों से गुजरते समय हर घर से चौकन्ना निगाहें पहरेदारी कर रही हैं। बाहरी आवागमन पर पाबंदी लगाने के साथ गांव सुरक्षा मानकों के बीच खुद पर सेहतमंद रखकर रोटी-रोजगार एवं खेती-किसानी में मस्त है। प्रवासियों के सेहतमंद मिलने पर उन्हें मनरेगा के साधनों में काम मिला है। सुबह से शाम तक गांव अपने आप में व्यस्त रहता है। दोपहर एवं शाम को शारीरिक दूरी और मास्क लगाकर होने वाली चौपाल में लोग प्रवासियों के सफर की कहानी सुनते हैं।

टांडा विकासखंड क्षेत्र के पश्चिमी क्षेत्र का गांवसभा फूलपुर की करीब ढाई हजार है। इसमें छंगू का पूरा, दहलवा, दयालपुर, रम्मनपुर, कुतुआपुर, हारीपुर मजरे है। सुबह साढ़े आठ बजे गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा था। ग्रामीण खेत व मनरेगा में काम करने निकले थे। हालांकि गांव के बुजुर्गों की निगाहें हर घर से निगरानी करती दिख रही थी। कोरोना काल में गांव के लोग खुद अपनी जिम्मेदारी का भरपूर एहसास कराते दिखे। परदेश से आए लोगों को गांव में सीधे प्रवेश नहीं मिलता है। गांव के बाहर ही क्वारंटाइन किए जाते हैं। गांव के बाहर फुटबॉल खेलने के लिए मैदान में नेट बाधा गया है, जहां पर शारीरिक दूरी का पालन करते हुए शाम-सुबह युवा पीढ़ी खेलती है।

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पहलवानी के जरिए स्वस्थ रहने की कवायद : फूलपुर गांव की मिट्टी अभी भी देश के धरोहर की निगरानी करती है। गांव के अंतरराष्ट्रीय पहलवान ध्रुवदेव पांडेय सुबह चार बजे ही उठकर अपनी दिनचर्या शुरू करते हैं। आठ बजे व्यायाम में लगे थे। इनके परिवार में दो बेटे सहित एक पोता भी व्यायामशाला में व्यायाम कर रहे थे। उन्होंने बताया व्यायाम से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रही है। कोरोना काल में तो सबसे जरूरी शरीर को स्वस्थ रखने ही है।

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प्रवासियों को घर में सीधे प्रवेश नहीं करवाया जाता है। मनरेगा के तहत गांव के युवाओं को रोजगार दिलाया जा रहा है। मास्क भी बांटें जा रहे हैं।

-जगराम वर्मा

ग्राम प्रधान

Posted By: Jagran

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