अंबेडकरनगर

केस एक-मालीपुर थाने में दारोगा द्वारा चलाई गई गोली से एसओ के पत्‍‌नी की मौत।

केस दो-रिश्वतखोरी में हंसवर थाने में तैनात दारोगा संजय राय को जेल।

केस तीन-इब्राहिमपुर पुलिस की अभिरक्षा में महिला की मौत।

यूपी पुलिस के स्याह चेहरे की हकीकत बयां करने को हाल के दिनों में जिले में हुई यह घटनाएं काफी हैं। ऐसी घटनाओं से जहां एक ओर पुलिस और जनता के बीच विश्वास का संकट उत्पन्न हो रहा है, वहीं दूसरी ओर रक्षकों की भक्षक वाली प्रवृत्ति भी जगजाहिर हो रही। ऐसे में पुलिस के चेहरे में निखार के बावजूद विकृत स्वरूप झलक रहा है।

हर्ष फायरिंग की घटना को रोकने के लिए शासन स्तर से अधिकारियों के लंबे-चौड़े फरमान जारी किए जाते हैं। प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी तक लगातार सर्कुलर जारी करते हैं। इसका प्रभावी ढंग से अनुपालन कराने की ताकीद खाकी वालों को की जाती है। अब सवाल उठता है कि जब वह ही जश्न में डूबने के लिए कानून की खिल्ली उड़ाने को आतुर हो जाएं तो भला आम आदमी का क्या होगा? मालीपुर थाने की घटना ने इसी यक्ष प्रश्न का जन्म दिया है। दूसरा गंभीर सवाल है पुलिस की नीयत का। नीयत तभी साफ होगी जब ईमानदारी का पाठ पढ़कर आने वाले पुलिसकर्मी उसका अनुपालन करने की कूबत रखेंगे लेकिन यहां तो इसका उलट हो रहा है। विवेचना में मनमानी रिपोर्ट, सही-गलत एफआइआर और मौका-मुआयना तक में पुलिसकर्मी निज स्वार्थ साधने में पीछे नहीं हैं। मुकदमें में आरोपी को क्लीनचिट देने के एवज में घूस लेते समय दारोगा की गिरफ्तारी महज एक घटना नहीं है बल्कि पुलिस ने वर्तमान चेहरे को उजागर करता है। तीसरा सबसे अहम विषय पुलिस के इकबाल का है। इब्राहिमपुर थाने की पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए हिरासत में ली गयी महिला की मौत हो गयी। इसको लेकर जनाक्रोश उपजा, राजनीतिक दलों ने आंदोलन तक का राग अलापा। इसके बावजूद अब तक इस गंभीर मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इतना ही नहीं पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए गत दिनों नागरिकों ने राजेसुल्तानपुर थाने पर धावा बोल दिया था। एसओ पर ईट-पत्थर के अलावा जूते-चप्पल भी चलाए गए। मामले में नागरिकों के विरुद्ध मुकदमा तो दर्ज कर लिया गया लेकिन हकीकत में दोषियों की जवाबदेही तय नहीं की गयी।

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-काल खींच लाया शांती को

फोटो : 19एएमबी10,12,13

अंबेडकरनगर : प्रतापगढ़ जिले के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के अंकारीपुर ठाडर पट्टी निवासी सुरेश पटेल यहां मालीपुर थाने में थानाध्यक्ष पद पर तैनात हैं। इनकी पत्‍‌नी शांती देवी अपने दो पुत्रों के साथ लखनऊ में निर्मित मकान में रहती थीं। शांती का उपचार यहां के चिकित्सक का चल रहा था। इस कारण उनका यहां आना-जाना प्राय: लगा रहता था। गत सोमवार को अपराह्न करीब चार बजे एसओ सुरेश पटेल पत्‍‌नी शांती देवी के साथ यहां पहुंचे, जहां चिकित्सक को दिखाने के बाद वह नवागत एसपी की बैठक में शिरकत करने चले गए। देर शाम करीब साढ़े आठ बजे वह शांती देवी के साथ मालीपुर थाने पहुंचे, जहां मानो काल उनकी पत्‍‌नी का इंतजार कर रहा था।

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-मददगार भी बना रहा दारोगा

अंबेडकरनगर : हर्ष फायरिंग में शंाती देवी की मौत मामले का आरोपी दारोगा घनश्याम मिश्र घटना के बाद पुलिस कर्मियों के साथ-साथ रहा। थानाध्यक्ष सुरेश पटेल एवं अन्य पुलिसकर्मियों के साथ दरोगा जिला चिकित्सालय तक आया, जहां वह लगातार सात बजे तक पीड़ित परिवारीजनों की मदद में लगा रहा लेकिन बिना किसी को बताए अचानक भाग निकला।