राजीव दीक्षित, लखनऊ

वाहनों की तेज गति भले ही ज्यादातर सड़क दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार हो लेकिन इन हादसों के लिए कुख्यात स्थलों (ब्लैक स्पॉट्स) के रोड सेफ्टी ऑडिट की रफ्तार सुस्त है। ब्लैक स्पॉट्स की रोड सेफ्टी ऑडिट तो फिर कराई जा रही है, कोर रोड नेटवर्क की सेफ्टी ऑडिट अभी दूर की कौड़ी है।

सड़कों पर वर्ष 2016 में चिन्हित किए गए ब्लैक स्पॉट की रोड सेफ्टी ऑडिट कछुआ चाल चल रही है। लोक निर्माण विभाग के अधीन राज्य राजमार्ग श्रेणी की सड़कों का रोड सेफ्टी ऑडिट विश्व बैंक परियोजना से कराने के लिए बीते कई महीनों से कागज दौड़ाए जा रहे हैं लेकिन अभी यह कोशिशें अंजाम तक नहीं पहुंच सकी हैं। कोर रोड नेटवर्क में शामिल प्रमुख जिला मार्गों का रोड सेफ्टी ऑडिट एशियन डेवलपमेंट बैंक से पोषित परियोजना के अंतर्गत कराने का प्रस्ताव रद हो चुका है। अब इसके लिए नए सिरे से प्रयास किए जाएंगे। विभाग के अधीन बचे हुए 105 मार्गो का रोड सेफ्टी ऑडिट का काम नई दिल्ली स्थित सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआइ) को फरवरी 2019 में स्वीकृत किया जा सका है। अभी तक विभाग को सीआरआरआइ से 30 सड़कों की सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट ही मिल सकी है। वहीं वर्ष 2018 में चिन्हित किए गए ब्लैक स्पॉट के रोड सेफ्टी ऑडिट का कार्य फरवरी 2020 में आइआइटी दिल्ली और आइआइटी बीएचयू को सौंपा जा सका है जिसमें से 44 रिपोर्ट विभाग को मिल चुकी हैं।

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सर्वाधिक दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों पर : सड़क हादसों के लिहाज से सर्वाधिक दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों पर होती हैं। लिहाजा सर्वाधिक ब्लैक स्पॉट इन्हीं सड़कों पर होते हैं। वजह यह है कि सर्वाधिक भारी ट्रैफिक और तेज रफ्तार वाहन इन पर चलते हैं। दूसरा स्थान राज्य राजमार्गों का है।

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संसाधनों की कमी : सड़क सुरक्षा के लिए विभागीय बजट की न्यूनतम ढाई फीसद राशि आवंटित होनी चाहिए लेकिन खींचतान कर भी इस मद में एक फीसद से भी कम रकम खर्च की जाती है। इसके लिए दूसरे मदों की अप्रयुक्त राशि का इस्तेमाल करना पड़ता है। वर्ष 2020-21 में लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़क सुरक्षा के मद में 39 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई। इसके सापेक्ष रोड सेफ्टी के लिए 105 करोड़ रुपये की 86 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं जिनके लिए 30 करोड़ रुपये की रकम जारी की गई है।

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किस सड़क पर कितने ब्लैक स्पॉट

मार्ग - वर्ष 2019 - वर्ष 2020 राष्ट्रीय राजमार्ग - 649 - 637 राज्य राजमार्ग - 282 - 277 अन्य मार्ग - 200 - 196 ---- सड़क निर्माण या इंजीनियरिग से जुड़ीं मार्ग दुर्घटनाओं की वजहें -जंक्शन (तिराहे/चौराहे) पर वाहनों की टक्कर -संकरी पुलिया -तीव्र मोड़

-जमीन की सतह से ऊंची सड़क

-सड़क पर गड्ढे -लापरवाही से किया जा रहा सड़क निर्माण ---- सड़क सुरक्षा के लिए किये गए उपाय -27,831 चिन्हित तिराहों/चौराहों में 24,899 में यातायात सुधार के काम पूरे। इन पर 20,865 रंबल स्ट्रिप, 19,111 जेब्रा क्रासिग तथा 67,105 सांकेतिक बोर्ड लगाये गए। -वर्ष 2016 में विभागीय मार्गों पर चिन्हित 417 और वर्ष 2018 में 504 ब्लैक स्पॉट्स पर सड़क सुरक्षा के अल्पकालिक उपाय पूरे। -2137 संकरी पुल/पुलियों में से 1553 का पुनर्निमाण/मरम्मत पूरी। -लोक निर्माण विभाग के मार्गों पर 1218 अनधिकृत ढाबों को हटाया गया। -सड़कों के किनारे खड़े वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने की खातिर रोड साइड एमेनिटीज निर्माण के लिए 31 स्थल चिन्हित। मथुरा में ट्रक और बस ले-बाई का निर्माण पूरा। ---- 'सड़क सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। अब पांच किमी या अधिक लंबी सड़क परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में रोड सेफ्टी के कार्यों के लिए अलग से प्रावधान किया जा रहा है। अब तक 21,198 करोड़ रुपये के लागत की 467 परियोजनाओं में 273 करोड़ रुपये के रोड सेफ्टी कार्यों का परीक्षण किया जा चुका है।'

-नितिन रमेश गोकर्ण, प्रमुख सचिव लोक निर्माण

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