अंबेडकर नगर की पुष्पा बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल, 20 हजार से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा
अंबेडकरनगर की पुष्पा पाल महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बना रही हैं और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर ...और पढ़ें
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HighLights
पुष्पा पाल ने 20 हजार से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ अधिकारों के प्रति जागरूक करती हैं।
जन शिक्षण केंद्र के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण कर रही हैं।
महेंद्र प्रताप सिंह, अंबेडकरनगर। महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में बेवाना की पुष्पा पाल जुटी है। पिता राम बहादुर पाल (आरबी पाल) की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने महिला सशक्तीकरण को अपने अभियान का केंद्र बनाया है।
उनके प्रयासों से न सिर्फ महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, बल्कि वे अपने हक की आवाज उठाने के लिए भी आगे आ रही है। बीते 15 वर्ष में 15 हजार महिलाओं, चार हजार किशोरियों एवं 1700 महिला किसानों को जोड़कर उन्हें रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ा है।
पुष्पा पाल जन शिक्षण केंद्र संस्थान के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम चला रही है। संस्थान में 35 महिलाओं को रोजगार दिया गया है, जिन्हें इसके बदले मानदेय मिलता है। वहीं, करीब 20 हजार महिलाओं को सीधे स्वरोजगार से जोड़ा गया है। इसमें जैविक खेती, वर्मी खाद बनाना, सब्जियों की खेती, मत्स्य पालन, फलदार पौधों को रोपित करना, खाद्य उत्पाद बनाना, जीरामजी राम में रोजगार सहित विभिन्न कार्य दिला रही है।
इससे महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में भी योगदान दे रही है। उनका कार्यक्षेत्र केवल अंबेडकरनगर तक सीमित नहीं है। अयोध्या, सुल्तानपुर और वाराणसी में भी वह महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, उनके अधिकारों की जानकारी देने और सामाजिक मुद्दों पर जागरूक करने में जुटी है। इस मुहिम से 10 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी है। समय-समय पर संगोष्ठियों और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति सजग किया जाता है। पुष्पा जिले के 100 एवं सुल्तानपुर के 25 मुसहर जाति के बच्चों को प्रतिदिन दूध, बिस्किट एवं प्री-शिक्षा मुहैया करा रही है।
महिला किसानों के हक की भी उठाती है आवाज
पुष्पा पाल की पहल का दायरा रोजगार तक ही सीमित नहीं है। महिला किसानों के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक भागीदारी जैसे मुद्दे भी उनके अभियान का हिस्सा है। इन विषयों पर महिलाएं एकजुट होकर अपनी बात रखती है और समस्याओं के समाधान की मांग करती है। पिता से मिली सामाजिक सरोकारों की विरासत को आगे बढ़ा रहीं पुष्पा का प्रयास महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने के साथ उन्हें जागरूक और आत्मविश्वासी बनाना है। पुष्पा पाल ने बताया कि महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ अपने अधिकारों की जानकारी भी होनी चाहिए। तभी वे आत्मनिर्भर बनने के साथ समाज में अपनी भागीदारी प्रभावी ढंग से निभा सकेंगी।
