अंबेडकरनगर : कुदरत भी कैसे करिश्मे दिखाती है। इसका अंदाजा रविवार को दिखा। करीब 15 साल पहले मेले में माता-पिता से बिछड़ा बेटा एकाएक उन्हें मिला गया। उम्र के आखिरी पड़ाव में पहुंचे दंपति को मानों खजाना मिला गया। बेटे को गले लगाकर मां-बाप फफक पड़े।

वाकया कुछ ऐसा हुआ कि बस्ती जिले के थाना नगर के स्थानीय निवासी शमशुल हक (35) पुत्र अब्दुल हक वर्ष 2004 में 15 वर्ष की उम्र में घर से ताजिया मेला देखने निकला और अचानक गायब हो गया। तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चल सका। इस बीच वह भटककर महरुआ कस्बे में पहुंच गया। यहां स्थानीय निवासी शमशीर अली पुत्र शब्बीर अली ने उसे अपने घर रखकर देखभाल किया। तब से वह यहीं रहता था, लेकिन उसे अपने मां, बाप, घर का पता तक नहीं याद था। वह अपनों को भूल चुका था। लेकिन मां के जेहन में बेटे की याद व उसका चेहरा हमेशा कौंधता रहता था। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। रविवार को अब्दुल हक अपनी पत्नी साकिया बानो के साथ प्रतापगढ़ अपनी रिश्तेदारी से बस से घर लौट रहे थे। रविवार को दोपहर बस महरुआ कस्बे में यात्रियों को उतारने के लिए खड़ी हुई।

इसी बीच अब्दुल हक की पत्नी साकिया बानो की नजर वहां टहल रहे युवक पर पड़ी। उसने तत्काल उसकी पहचान अपने बेटे शमशुल हक के रूप में किया। आनन-फानन में वह बस से उतरकर उसके पास पहुंचकर सीने से लगा लिया। यह देककर सभी हतप्रभ रह गए। इसके बाद मां-बेटे एक दूसरे को पहचान गए और आपस में लिपटकर रोने लगे। यह नजारा देख वहां भीड़ तथा यूपी-112 के पुलिसकर्मी पहुंच गए। पुलिस के पूछने पर मां ने उसके सिर, पैर, हाथ में चोट के निशान, आइडी प्रूफ आदि दिखाने के बाद पुलिस ने उन्हें साथ जाने दिया। थानाध्यक्ष शंभूनाथ ने बताया मां-बाप अपने बेटे को लेकर घर चले गए।

Posted By: Jagran

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