जलालपुर (अंबेडकरनगर) : करोड़ों की लागत से नगर में निर्मित 20 शैय्या के प्रसूति केंद्र को बगैर चिकित्सक ही संचालित करने की जद्दोजहद स्वास्थ्य महकमे द्वारा की जा रही है। यहां एक भी महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। जांच के लिए आवश्यक उपकरण के अभाव के चलते जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की देखरेख बेमानी साबित हो रही है। उपयोगी दवाइयां भी बाहर के मेडिकल स्टोर से ही अधिकांशत: मरीजों को लेनी पड़ती है। महिला चिकित्सक की तैनाती न होने पर नगपुर सीएचसी में नियुक्त डॉ. मोहसिना व संविदा चिकित्सक डॉ. शशिबाला को यहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तैनाती कर किसी तरह केंद्र का संचालन किया जा रहा है। आबादी के हिसाब से यहां बड़ी संख्या में महिला मरीजों को आगमन होता है। ऐसे में महज दो महिला चिकित्सकों के लिए प्रतिदिन सौ से अधिक महिला मरीज व बच्चों को देख पाना मुश्किल हो रहा है। हास्यापद तो यह है कि मैटरनिटी सेंटर होने के बावजूद अस्पताल में न तो एक्स-रे मशीन है न ही अल्ट्रासाउंड मशीन। इलाज के लिए अस्पताल के समीप व नगर में प्राइवेट केंद्रों पर जांच के लिए मरीजों को विवश होना पड़ रहा है। फार्मासिस्ट रवि श्याम पटेल, दो स्टाफ नर्स श्वेता वर्मा व कमनलनाथ,लैब टेक्नीशियन चंद्रभान यादव व एक आया समेत कुल पांच कर्मचारियों के जिम्मे ही इस अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी है। स्थिति यह है कि बिजली कटने पर पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है। यहां जनरेटर तक की सुविधा नहीं है। शुद्ध पेयजल के लिए आरओ सिस्टम तक नहीं लगा है।

सफाई कर्मचारी की तैनाती नहीं

जलालपुर : मैटरनिटी सेंटर के वजूद में आने के बावजूद सफाईकर्मी की नियुक्ति नहीं, जिससे अस्पताल परिसर में गंदगी व कूड़े का ढेर है। मंगलवार को निरीक्षण में पाया गया कि संसाधन के अभाव में चिकित्सकों व स्टाफ की मेहनत भी रंग नहीं ला रही है। समूचे दिन मरीजों का तांता लगा रहता है। कभी-कभार तो महिलाओं को लौट जाना पड़ता है। मैटरनिटी सेंटर पर स्थापित शल्य कक्ष में हमेशा ताला लगा रहता है। कारण है सर्जन महिला का अभाव है। उधर दूसरी ओर गर्भवती महिलाओं की प्रसव व्यवस्था तो है, लेकिन उपकरणों के निष्प्रयोज्य रहने से रखरखाव बेहतर ढंग से नहीं हो पाता।

भर्ती रहती हैं प्रसव पीड़ित महिलाएं

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना को के तहत रसूलपुर बाकरगंज की प्रथम प्रसव की 20 वर्षीय माधुरी का रजिस्ट्रेशन करा अस्पताल ले आईं आशा माधुरी की उपस्थिति में स्वास्थ्यकर्मी द्वारा पीड़िता को ग्लूकोज का चढ़ाया जा रहा था। डॉ. शशिबाला ने बताया कि सीमित संसाधनों के रहते समुचित इलाज के लिए प्रयास किया जा रहा है। माह भर के भीतर ही 32 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया है। सीएमओ डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के सहारे मरीजों को बेहतर लाभ देने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। जो समस्याएं हैं उनका जल्द ही समाधान कराया जाएगा। महिला चिकित्सक व स्टाफ के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।

Posted By: Jagran