रामानुज मिश्र, अंबेडकरनगर: जिले के प्रमुख सियासतदां में शुमार राकेश, राजेश, चंद्रप्रकाश, रामअचल, लालजी आदि नेताओं की पारिवारिक पृष्ठभूमि अलग-अलग है। इनका राजनीतिक इतिहास भी जुदा है। जाति और क्षेत्र भी अलग है, लेकिन उनमें एक बात विशेष रूप से समान है कि सब दलबदलू हैं। एक बार फिर वे अपना मायाजाल फैलाए हैं और विधानसभा चुनाव में जनता को छलने के लिए तैयार बैठे हैं।

इन नेताओं की न किसी पार्टी के प्रति निष्ठा है, न अपनी कोई विचारधारा। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पिछले साल हुए पंचायत चुनाव में विरोधियों को फायदा पहुंचाने के आरोप में बसपा से निकाले गए दोनों पूर्व मंत्री रामअचल राजभर और लालजी वर्मा बार-बार लोगों से यह कहते रहे कि बहनजी को गुमराह कर उन्हें पार्टी से निकलवाया गया, लेकिन इसके बाद भी वे पार्टी से नाता नहीं तोड़ेंगे और उसके पक्ष में प्रचार-प्रसार करने के साथ अपना वोट देते रहेंगे। पार्टी में वापसी के लिए लखनऊ से दिल्ली तक तमाम कोशिशें भी हुईं, लेकिन दाल नहीं गलने पर मुश्किल से ढाई महीने पहले सपा मुखिया अखिलेश यादव को बुलाकर दोनों पूर्व मंत्री साइकिल पर सवार हो गए।

इसी तरह जलालपुर विधानसभा सीट से अलग-अलग दलों से कई बार विधायक रहे शेरबहादुर सिंह के पुत्र राजेश सिंह भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए करीब महीनेभर पहले भाजपा छोड़ हाथी पर सवार हो गए। अब वह जलालपुर सीट से बसपा के घोषित प्रत्याशी हैं, जबकि इससे पहले दो बार यहीं से भाजपा से चुनाव लड़ चुके हैं। दोनों ही मर्तबा उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। वहीं, बसपा से पूर्व सांसद राकेश पांडेय चुनाव का ऐलान होने से चंद दिनों पहले सपा की छांव में चले गए और अब जलालपुर विधानसभा क्षेत्र से टिकट के प्रबल दावेदार हैं। इससे पहले सन 2002 में राकेश पांडेय इसी सीट से सपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। अकबरपुर नगरपालिका के लगातार दो बार अध्यक्ष रहे चंद्रप्रकाश वर्मा अपने नरम मिजाज के लिए जाने जाते हैं। नगरपालिका में उन्होंने कई अच्छे काम भी किए, जिसके लिए वह आज भी जाने जाते हैं, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में अकबरपुर सीट से शिकस्त मिलने और दोबारा पार्टी से टिकट न मिलने की संभावना भांप कुछ दिनों पहले भाजपा छोड़ बसपा की शरण में चले गए। अब वह अकबरपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में हैं। इसी तरह बसपा के पुराने साथी रहे पूर्व सांसद त्रिभुवन दत्त भी पार्टी में पूछ कम होने पर करीब सालभर पहले सपा की शरण में चले गए। वह आलापुर सुरक्षित सीट से अपनी दावेदारी हासिल करने में जुटे हैं।

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