गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, अंबेडकरनगर की रामलीला में 5 दशक से मुस्लिम युवा बनते हैं अंगद-भरत
अंबेडकरनगर के भीटी कस्बे में 54 वर्षों से रामलीला गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश कर रही है।

मुस्लिम समुदाय के युवा अंगद, भरत और जामवंत जैसे प्रमुख किरदार निभाते हैं।
HighLights
भीटी रामलीला 54 वर्षों से सौहार्द की मिसाल।
मुस्लिम युवा निभाते हैं अंगद, भरत जैसे किरदार।
आयोजन 27 अक्टूबर से, तैयारियां पूरी।
संवाद सूत्र, भीटी (अंबेडकरनगर)। 54 वर्षों से भीटी कस्बे की रामलीला गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। यहां, अंगद, भरत, जामवंत, वाणासुर व गुरु वशिष्ठ समेत कई किरदार मुस्लिम समुदाय के युवक निभाते हैं। मोहम्मद जुनैद अंगद, केवट तथा माली, मोहम्मद अकरम भरत, मोहम्मद नईम जामवंत, बाणासुर, मारीच और मोहम्मद समीर वानरराज नल और मोहम्मद आरजू गुरु वशिष्ठ का किरदार निभाते हैं।
तमाम अल्पसंख्यक युवक विभिन्न छोटे किरदार कर रामलीला की शोभा बढ़ाते हैं। इतना ही नहीं दर्शक में भी उक्त समुदाय की बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी रहती है। दोनों समुदाय के दर्शक उनके अभिनय की तारीफ संग रामलीला का आनंद उठाते हैं। वे अपने किरदारों को संजीदगी से पेश कर आपसी भाईचारे का संचार करते हैं। अल्पसंख्यक किरदारों को देवी-देवताओं के गीत, प्रसंग, डायलॉग और चौपाई कंठस्थ है। इससे इतर वे सुंदरकांड, अखंड रामायण, दुर्गा पूजा आरती संग रामलीला में पूरी निष्ठा से सहयोग करते हैं।
वे किरदारों तक ही नहीं सीमित हैं बल्कि आयोजन के लिए चंदा, तैयारी और व्यवस्था में भी सपरिवार सहयोग करते हैं। कलकत्ता की रामलीला से प्रभावित स्व. कन्हैया लाल मोदनवाल ने यहां की रामलीला 1972 में शुरू कराई थी। तभी से यह रामलीला अनवरत चल रही है। रामलीला समिति अध्यक्ष घनश्याम मोदनवाल ने बताया कि 7 दिन में करीब तीन लाख रुपये खर्च आता है।
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इसकी व्यवस्था समिति के सदस्यों, व्यवसाइयों, ग्रामीणों और कलाकारों द्वारा निजी मद व चंदा आदि से किया जाता है। प्रतिदिन 40 से 42 हजार रुपये खर्च होता है। दर्शकों की सुविधा के लिए टेंट, कुर्सी, चटाई, शौचालय, पेयजल, सुरक्षा आदि की समुचित व्यवस्था समिति के सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से की जाती है। यहां आगामी 27 अक्टूबर से रामलीला का मंचन शुरू होगा। समिति के अध्यक्ष ने बताया कि तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
