काशी में यह सुबह सबसे अनोखी होती है, रामनगर की रामलीला में सूर्योदय संग होती है अनोखी आरती
रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में श्रीराम राज्याभिषेक के बाद भोर में अनोखी आरती का आयोजन हुआ। लाखों श्रद्धालु इस अद्वितीय ...और पढ़ें

रामनगर रामलीला में सूर्योदय के साथ अनोखी आरती का अद्भुत नजारा।
HighLights
श्रीराम राज्याभिषेक के बाद रामनगर में भोर की आरती।
लाखों श्रद्धालुओं ने काशिराज परिवार संग देखी अनोखी परंपरा।
माता कौशल्या ने राम-सीता की आरती उतारी अयोध्या सिंहासन पर।
जागरण संवाददाता, (रामनगर) वाराणसी। यह वो अनोखी रात होती है जब रात को भी सुबह का इंतजार मानो होता है। रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में यह सुबह उस पल का होता है जब अनोखी आरती को देखने के लिए काशी का एक और लक्खा मेला परवान चढ़ता है।
रामनगर में श्रीराम राज्याभिषेक के बाद नगर की सड़कें सारी रात गुलजार रहीं। रविवार को भोर में होने वाली आरती को देखने के लिए लाखो की संख्या में लोग पूरी रात नगर में जगह जगह हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिरकत करते दिखे। सोमवार प्रातःकाल जैसे ही 5.43 बजे, काशिराज परिवार के अनन्त नारायण सिंह किले से बाहर आते हैं और हर हर महादेव के उदघोष से पूरा नगर गूंज उठता है।
भीड़ इतनी की मानो लोग पानी की तरह बह रहे हों। आस्था अपने चरम पर थी। काशिराज परिवार के अनन्त नारायण सिंह अपने राजपरिवार के सदस्यों व दरबारियों के साथ दुर्ग से पैदल चलकर अयोध्या मैदान पहुंचते हैं।
सुबह 5 बजकर 48 मिनट पर भगवान भास्कर ने जैसे ही अपनी आंखें खोलीं, माता कौशल्या ने अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान श्रीराम व सीता साथ मे खड़े भरत, लक्ष्मण, शत्रुध्न तथा श्रीराम के चरणों मे नतमस्तक भक्त शिरोमणि हनुमान जी की आरती उतारी।
भोर की आरती के नाम से प्रसिद्ध इस आरती को लेने के लिए अयोध्या मैदान व आस पास के भवनों पर देर रात्रि से ही जमे लीलाप्रेमियो ने सपरिवार रंग-बिरंगी महताबी की लाल श्वेत रोशनी में इस अनुपम झाँकी को अपने मानस पटल पर अंकित कर लिया। अनन्त नारायण सिंह ने भी खड़े होकर राम राज्याभिषेक की आरती का दर्शन कर अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित परम्पराओं का बखूबी निर्वहन किया।
हर हर महादेव के उदघोष के बीच अनंत नारायण सिंह जहां आरती परम्परा के बाद हवाखोरी के लिए निकले वही श्री राम को कंधे पर उठाये बजरंग बली व सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुधन को उठाये भक्तगणो के साथ पांचों स्वरूप बाजार भृमण का प्रसंग सम्पन्न कराने लीलास्थल से बलुआघाट स्थित धर्मशाला पहुँचे।
