'सिर्फ धान नहीं, डूबा किसानों का अरमान', अंबेडकरनगर में बेमौसम बारिश से खेत बने तालाब
अंबेडकरनगर में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे उनके चेहरे ...और पढ़ें
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HighLights
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से अंबेडकरनगर में धान की फसल बर्बाद।
चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के बाद पश्चिमी विक्षोभ ने बढ़ाई किसानों की चिंता।
जलमग्न खेतों में डूबी फसल देख किसानों की आंखें हुईं नम।
संवाद सूत्र, अंबेडकरनगर। खेत में खड़ी फसल देखकर जिन किसानों के चेहरे पर कुछ दिन पहले तक मुस्कान थी,मंगलवार को उसकी आंखें नम थीं। माथे पर चिंता की लकीरें थीं। मेहनत से तैयार धान की फसल पानी में डूबी है। किसान पानी में डूबीं बालियों को निहार रहे थे तो कुछ गिरी फसल को उठाकर बचाने की कोशिश कर रहे थे। प्रकृति की लगातार दूसरी चोट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
गत दिनों चक्रवाती तूफान ''''अर्नब'''' के जख्म अभी भरे भी नहीं थे। सोमवार शाम पश्चिमी विक्षोभ ने फिर झटका दे दिया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि ने बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। खेत जलमग्न हो गए। हालांकि, मंगलवार सुबह मौसम साफ हुआ, चटख धूप रही। अधिकतम तापमान 30 डिग्री पर पहुंचा तो किसान क्षतिग्रस्त फसल को बचाने में जुट गए। कटेहरी के रामलखन की आंखें भर आईं। बालियों को हाथ में उठाते हुए वह बोले, इस फसल के लिए दिन-रात मेहनत की थी।
पिछली बार चक्रवाती तूफान ने नुकसान किया, सोचा था इस बार फसल बच जाएगी,लेकिन अब फिर सब पानी में डूब गया। महरुआ के दिनेश ने कहा, धान पकने लगा था। कुछ ही दिन में कटाई शुरू करनी थी। अकबरपुर के सुनील गुप्ता की चिंता भी कम नहीं थी। उन्होंने गिरी फसल की ओर इशारा करते हुए कहा कि गाढ़ी कमाई बर्बाद हो गई। जुलाई से अक्टूबर तक 802 मिलीमीटर बारिश हुई। मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि आगामी 24 घंटे हल्के से मध्यम बादल छाए रहने तथा कहीं-कहीं तेज हवा व गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा होने व बौछारें पड़ने की संभावना रहेगी।
अब तक हुई बारिश के आंकड़े
जुलाई -350 मिली मीटर
अगस्त -255 मिलीमीटर
सितंबर-140 मिली मीटर
अक्टूबर -सोमवार तक 57 मिली मीटर
(नोट- आंकड़े आचार्य नरेन्द्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि द्वारा जारी)
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