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Prayagraj News: बुलंदशहर के नरौरा में दुनिया के सबसे पुराने बरगद की खोज, 500 साल है उम्र; ये है पेड़ की खासियत

Prayagraj News बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया प्रयागराज सेंटर के विज्ञानियों ने रोमानिया के विज्ञानियों के साथ मिलकर बुलंदशहर के नरौरा में दुनिया के सबसे पुराने बरगद के पेड़ का पता लगाने का दावा किया है। कार्बन डेटिंग के जरिए इसकी उम्र 500 वर्ष पाई गई है।

By Jagran NewsEdited By: Swati SinghPublished: Sat, 27 May 2023 12:37 PM (IST)Updated: Sat, 27 May 2023 12:37 PM (IST)
बुलंदशहर के नरौरा में दुनिया के सबसे पुराने बरगद की खोज, 500 साल है उम्र

प्रयागराज, मृत्यंजय मिश्र। शाश्वत जीवन और उर्वरता के प्रतीक बरगद के पेड़ों का आध्यात्मिक, पौराणिक और धार्मिक महत्व है। लंबे जीवनकाल और विशालता के लिए यह जाने जाते हैं। बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, प्रयागराज सेंटर के विज्ञानियों ने रोमानिया के विज्ञानियों के साथ मिलकर बुलंदशहर के नरौरा में दुनिया के सबसे पुराने बरगद के पेड़ का पता लगाने का दावा किया है।

कार्बन डेटिंग के जरिए इसकी उम्र 500 वर्ष पाई गई है। इससे पहले सबसे पुराना ज्ञात बरगद का पेड़ हावड़ा में हैं, जिसकी उम्र 350 साल आंकी गई है। इस बरगद के पेड़ को ऊपरी गंगा रामसर साइट में फ्लोरिस्टिक सर्वेक्षण के दौरान खोजा गया था। यह दुनिया में विशाल बरगद के पेड़ों में दसवें स्थान पर है। इसकी कैनोपी यानी ऊपरी घेरा 4069 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। इस पेड़ की खास बात यह है कि इसमें मुख्य तने का सपोर्ट करने वाली मात्र चार जड़ें हैं।

शोधकर्ता बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, प्रयागराज केंद्र की प्रभारी और वरिष्ठ विज्ञानी डा. आरती गर्ग ने बताया कि विशालता में सबसे बड़ा बरगद आंध्र प्रदेश में थिम्मम्मा मारीमानु है, जिसका क्षेत्रफल 19,107 वर्ग मीटर है। इसके बाद गुजरात में कबीर बरगद का पेड़ है, जो 17,520 वर्ग मीटर में फैला है। उन्होंने बताया कि बुलंदशहर के नरोरा पावर प्लांट से आठ किलोमीटर की दूरी पर दुनिया का सबसे उम्रदराज बरगद का पेड़ रामसर साइट क्षेत्र के लगभग सात हेक्टेयर में फैले सिद्धवारी पवित्र उपवन के बीचों बीच स्थित है।

इस पुराने बरगद को मानते हैं इच्छा-पूर्ति वृक्ष

वरिष्ठ विज्ञानी डा. आरती गर्ग ने कहा कि यह वृक्ष स्थानीय समुदाय द्वारा संरक्षित किया जा रहा है। लोग इस पुराने बरगद को इच्छा-पूर्ति वृक्ष मानते हैं। डा. आरती गर्ग ने बताया कि स्थानीय संरक्षकों की अनुमति के बाद इस बरगद के नमूने लेकर इसकी उम्र का पता लगाने के लिए रेडियो कार्बन तकनीक का प्रयोग किया गया। रेडियोकार्बन डेटिंग परिणाम नरोरा में भारतीय बरगद के लिए 500 वर्ष की आयु का संकेत देते हैं। इसके बाद यह ज्ञात बरगद के पेड़ों में सबसे उम्रदराज पेड़ बन गया है।

कई आपदाओं का सामना किया

यह बरगद 500 वर्ष पुराना होने के बाद भी काफी अच्छी स्थिति में है। रोमानिया के विज्ञानियों के साथ मिलकर इसकी सटीक उम्र का पता लगाया गया है। खास बात यह है कि इस अवधि में पेड़ ने विभिन्न आपदाओं और विभिन्न बीमारियों और हालातों का सामना किया है। इस वृक्ष को संरक्षित करने के लिए उचित कदम उठाने का सुझाव दिया गया है।

बरगद के फायदे

पत्तियों में हेक्सेन, ब्यूटेनाल, क्लोरोफॉर्म और पानी मौजूद होता है। पत्ते मोच और सूजन में भी उपचार के काम आते हैं। छाल के काढ़े से इम्युनिटी बढ़ती है। कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह को नियंत्रित करने में भी कारगर है। बरगद का दूध वात, पित्त, कफ को नष्ट करता है। बरगद से 24 घंटे में 20 घंटे तक ऑक्सीजन मिलती है।


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